पंचकूला। ‘वर्ल्ड क्लास’ रेलवे स्टेशन का तमगा पाने की तैयारी कर रही परियोजना खुद प्रदूषण के कटघरे में खड़ी है। स्टेशन के पंचकूला साइड पर करीब डेढ़ साल से मलबा और कचरे के ढेर जमे हैं। खुले आसमान के नीचे शॉट ब्लास्टिंग, टाइल कटिंग और मिट्टी का काम धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे बारीक धूल सीधे हवा में घुल रही है। सीएंडडी वेस्ट जगह-जगह फैला है और धूल नियंत्रण के इंतजाम कागजों तक सिमटे नजर आ रहे हैं।
यह चौंकाने वाला खुलासा चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) के 17 फरवरी को हुए निरीक्षण में सामने आया। टीम ने मौके पर पाया कि निर्माण कार्य में पर्यावरणीय मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। विभाग रिपोर्ट अंतिम रूप दे रहा है और कार्रवाई की तैयारी में है। शुक्रवार को अमर उजाला की पड़ताल में भी तस्वीरों ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी। चंडीगढ़ पहले से ही वायु गुणवत्ता सुधार की चुनौती से जूझ रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्यों को पाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच इस तरह की लापरवाही शहर की स्वच्छता रैंकिंग को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स में नियमों का पालन नहीं हुआ तो एक्यूआई सुधारना मुश्किल होगा।
निरीक्षण में सामने आए प्रमुख उल्लंघन
निर्माण स्थल पर लगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लंबे समय से बंद।
-अपशिष्ट प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं।
-भूजल का उपयोग लेकिन अनुमति उपलब्ध नहीं।
-डस्ट सप्रेसर/पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं मिली।
-एंटी-स्मॉग गन और निर्माण सामग्री को ढकने जैसे अनिवार्य उपायों का अभाव।
सख्त कार्रवाई की तैयारी
सीपीसीसी ने रेलवे और संबंधित ठेकेदार को तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। तय समय सीमा में एसटीपी चालू करने, मलबा हटाने और धूल नियंत्रण के उपाय लागू न करने पर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।
कोट
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर टीम जांच के लिए गई थी। रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -सौरभ कुमार, पर्यावरण निदेशक और सीपीसीसी सदस्य सचिव चंडीगढ़।