चंडीगढ़। बेअदबी मामले में पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने 2015 बरगाड़ी प्रकरण से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल की गई उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 में जो रोक है, वह सिर्फ उस समय लागू होती है जब मजिस्ट्रेट किसी अपराध का संज्ञान लेता है। एफआईआर दर्ज होने, जांच चलने या चार्जशीट दाखिल होने पर यह रोक लागू नहीं होती। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा कि धारा 195 की प्रक्रिया संज्ञान लेने के समय देखी जाती है और यह चरण अभी आया नहीं है, इसलिए इस आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग समय से पहले है।
वर्ष 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और कोटकपूरा तथा बहिबल लां में हुई हिंसा के बाद कई प्रदर्शन हुए थे। इन्हीं में से एक लुधियाना में हुआ, जिसका नेतृत्व कथित तौर पर बैंस ने किया था। लुधियाना पुलिस कंट्रोल रूम के सहायक आयुक्त की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आरोप था कि बैंस और उनके साथियों ने धारा 144 का उल्लंघन किया। पुलिस कार्य में बाधा डाली और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने ड्राइवर को पुलिस पार्टी पर वाहन चढ़ाने के लिए कहा। याचिका में एफआईआर, 2019 में मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई आगे जांच की अनुमति और 7 सितंबर 2021 की पूरक चार्जशीट को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि जांच आयोग की रद्द करने संबंधी सिफारिशें मजिस्ट्रेट के लिए बाध्यकारी नहीं हैं और आगे जांच का आदेश भी सही है।