फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula News: 296 करोड़ के मध्यस्थता अवॉर्ड मामले में जालंधर, मोगा नगर निगमों की अपील खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जालंधर और मोगा नगर निगमों की ओर से दायर अपीलें खारिज कर दी हैं। ये अपीलें वर्ष 2022 के 296 करोड़ रुपये से अधिक के मध्यस्थता अवॉर्ड के खिलाफ उनकी आपत्तियों को खारिज करने के खिलाफ थीं।
विज्ञापन

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नगर निगम जैसे सांविधानिक निकाय भी अवॉर्ड पर बिना शर्त स्थगन नहीं मांग सकते और उन्हें भी निजी पक्षों की तरह ही शर्तों का पालन करना होगा। यह मामला 2011 के उस कंसेशन एग्रीमेंट से जुड़ा है जिसके तहत फिरोजपुर और जालंधर क्लस्टर में इंटीग्रेटेड म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लागू किया जाना था।
समझौता नगर निगमों और जेआईटीएफ अर्बन वेस्ट मैनेजमेंट (जालंधर) लिमिटेड के बीच हुआ था। क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं के चलते विवाद मध्यस्थता के लिए भेजा गया। 15 जनवरी 2022 को आए अवॉर्ड में जालंधर नगर निगम को 204.44 करोड़ और मोगा नगर निगम को 92.29 करोड़ ब्याज सहित अदा करने का निर्देश हुआ। दोनों नगर निगमों ने अवॉर्ड को चुनौती देते हुए धारा 34 के तहत आपत्तियां दायर कीं और साथ ही धारा 36 में स्थगन भी मांगा। कॉमर्शियल कोर्ट ने पहले 2022 में बिना शर्त स्थगन दे दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर पुनर्विचार का निर्देश दिया।
विज्ञापन

अगस्त 2023 में कॉमर्शियल कोर्ट ने शर्त लगाई कि नगर निगम 100 प्रतिशत अवॉर्ड राशि एफडीआर के रूप में अदालत में जमा करें लेकिन नगर निगमों ने एक भी रुपया जमा नहीं किया और इस पर आपत्तियां खारिज कर दी गईं। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता कानून में सभी पक्षों के लिए समानता जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें