अभियोजन ने आरोप लगाया कि जांच में उसकी भूमिका सामने आई और कई लोगों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है। बचाव पक्ष ने 31 साल के बेदाग सेवा रिकॉर्ड और स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य नहीं होने का हवाला दिया।
पंचकूला में एचएसवीपी के सेक्टर-2 और सेक्टर-6 एमडीसी में वर्ष 2014-15 के दौरान आउटसीज कोटे के प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में आरोपी सुरजीत सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली।
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अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं हैं।
आउटसीज कोटे के लिए 4 मार्च 2012 को विज्ञापन जारी किया गया था और 27 अप्रैल तक दावे लिए गए थे। आवंटन को लेकर शिकायतों के बाद विभागीय जांच हुई। 25 अगस्त 2022 को सेक्टर-7 थाने में एफआईआर दर्ज हुई और 13 दिसंबर 2022 से स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच संभाली।
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सुरजीत सिंह को 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन ने आरोप लगाया कि जांच में उसकी भूमिका सामने आई और कई लोगों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है। बचाव पक्ष ने 31 साल के बेदाग सेवा रिकॉर्ड और स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य नहीं होने का हवाला दिया। वहीं अभियोजन ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और निष्पक्ष जांच की जरूरत को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।