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जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन व एमआरआई नहीं, यह चिंताजनक: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा के जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन व एमआरआई की सुविधाएं उपलब्ध न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकारी अस्पताल में लोगों को सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो वे कहां जाएंगे। कोर्ट ने अब दोनों राज्यों के सभी जिलों के सरकारी अस्पताल में इन दोनों सुविधाओं को उपलब्ध करवाने पर हरियाणा व पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हमें सरकार का हलफनामा नहीं बल्कि आदेश के पालन में लोगों के लिए सुविधाएं चाहिए।
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मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को कोर्ट को बताया गया कि मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू तक नहीं है और यह आसपास के कई क्षेत्रों के लिए रेफरल अस्पताल के रूप में काम करता है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि यह स्थिति सिर्फ आश्चर्यजनक नहीं बल्कि बेहद चिंताजनक है। जिले का अस्पताल गंभीर और आपात मामलों का भार उठाता है, वहां आईसीयू का न होना सीधे तौर पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ के समान है।
हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं की स्थिति पर विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करें। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर क्यों प्रत्येक जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पूरे पंजाब में केवल 6 जिला अस्पतालों में ही एमआरआई मशीनें उपलब्ध हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
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कहा-अनुपालन हलफनामे संतोषजनक नहीं
जिला अस्पतालों पर भारी आबादी और गंभीर रोगियों का दबाव रहता है, ऐसे में आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव सीधे तौर पर इलाज की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में अब तक दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे संतोषजनक नहीं हैं। भीष्म किंगर ने याचिका दाखिल करते हुए मालेरकोटला सिविल अस्पताल में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि रेफरल अस्पताल होने के बावजूद यहां आईसीयू समेत कई जरूरी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सेवाओं को निजी प्रयोगशालाओं को आउटसोर्स करने पर भी सवाल उठाए।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की जल्द होगी भर्ती
पंजाब सरकार ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों के 161 पद भरने का निर्णय लिया गया है और इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार है। हाईकोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है और इसे फिलहाल पूरा करने के लिए प्राइवेट डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं।
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