चंडीगढ़। स्थायी लोक अदालतों (पीएलए) में चेयरमैन व स्टाफ की कमी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार, पंजाब सरकार, यूटी प्रशासन व इनकी लीगल सर्विस अथॉरिटी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ के एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया कि कानूनी विवादों का जल्द निपटारा करने के उद्देश्य से स्थायी लोक अदालतों की स्थापना की गई थी। पूरे देश में 339 लोक अदालतें हैं। पंजाब में इनकी संख्या 22 है। पंजाब में लोक अदालतों की हालत बेहद खराब है। यहां पर किसी भी अदालत में स्टाफ पूरा नहीं है। फिरोजपुर और फाजिल्का में चेयरमैन तक मौजूद नहीं है तो वहीं बठिंडा, गुरदासपुर, मोगा, संगरूर और मुक्तसर साहिब में चेयरमैन का चार्ज अन्य जिलों के चेयरमैन को दिया गया है।
इसके साथ ही ज्यादातर पीएलए में अहलमद, प्रोसेस सर्वर, कॉपी ब्रांच, जजमेट राइटर व रिकाॅर्ड कीपर तक मौजूद नहीं हैं। वर्तमान स्टाफ के साथ भी बीते एक साल में 10000 मामलों का निपटारा किया गया है। यदि पूरा स्टाफ मौजूद हो तो काम और बेहतर तरीके से हो सकेगा। हाईकोर्ट के कहने पर याची ने इस मामले में हरियाणा व चंडीगढ़ को भी पक्ष बना लिया। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब व यूटी प्रशासन के साथ ही इनकी लीगल सर्विस अथॉरिटी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।