चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक पर लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए शहर के संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) इंजीनियर तरुण माथुर की तरफ से दिए गए ‘सिग्नल फ्री इंटरचेंज’ के प्रस्ताव पर वीरवार को यूटी सचिवालय में विस्तार से चर्चा की गई। इसमें एनएचएआई और प्रशासन की तरफ से रखे गए कंसल्टेंट कंपनी स्टूप ने कई आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका तर्क है कि सिग्नल फ्री इंटरचेंज मॉडल के मोड़ काफी तीखे हैं, जो नेशनल हाईवे के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन की टेक्निकल कमेटी के सामने तरुण माथुर ने अपने सिग्नल फ्री इंटरचेंज को लेकर एक प्रेजेंटेशन दी, जिसको कंसल्टेंट कंपनी स्टूप व सभी अधिकारियों की तरफ से देखा गया। कंसल्टेंट कंपनी की तरफ से कहा गया कि तरुण माथुर की तरफ से बनाए गए प्रस्ताव में इंटरचेंज के मोड़ काफी तीखे हैं। इनके दायरे को दोगुना करने की जरूरत है।
इस पर तरुण माथुर की तरफ से कहा गया कि ट्रिब्यून चौक से जाने वाली सड़कें शहर के अंदर जाती हैं। ऐसे में यह नेशनल हाईवे का मामला नहीं है। कहा कि उनके द्वारा बनाए गए प्रस्ताव में मोड़ मटका चौक और आईएसबीटी-17 के चौक के जितना ही है, बल्कि उससे ज्यादा ही हैं। गौरतलब है कि यूटी प्रशासन ने टिब्यून फ्लाईओवर के लिए एक कंसल्टेंट कंपनी को हायर किया है, जिसका नाम स्टूप है।
मोड़ को चौड़ा किया तो दोगुना हो जाएगा प्रोजेक्ट का क्षेत्र
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अगर मोड़ को अगर चौड़ा किया जाता है तो प्रशासन को पूरे प्रोजेक्ट के लिए काफी भूमि अधिग्रहित करनी पडे़गी। क्योंकि पूरे प्रोजेक्ट का क्षेत्र दोगुना हो जाएगा। इसमें पेप्सू और ट्रिब्यून की भी जमीन प्रशासन को लेनी पड़ेगी जबकि वर्तमान के प्रोजेक्ट में किसी भी तरह के जमीन को एक्वायर करने की जरूरत नहीं है। बैठक में प्रशासन का भी यही रुख रहा कि नेशनल हाईवे के नियमों के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं। अब 12 फरवरी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रिब्यून फ्लाईओवर को लेकर सुनवाई होनी है।
दिल्ली के एम्स चौक के जैसा है तरुण माथुर का प्रस्ताव
तरुण माथुर ने बताया कि उनका प्रस्ताव दिल्ली में एम्स के पास स्थित चौक की तर्ज पर है। चंडीगढ़ के हेरिटेज स्टेटस को देखते हुए फ्लाईओवर ठीक नहीं है इसलिए उनका प्रस्ताव जमीन से महज 2 मीटर ऊंचा और साढ़े 4 मीटर नीचे होगा। यह पूरी तरह से सिग्नल फ्री होगा। किसी भी तरफ जाने के लिए लोगों को किसी भी लाल बत्ती व कहीं भी रुकना नहीं पड़ेगा।
यह ट्रैफिक को घुमा कर डायवर्ट कर देगा। इससे जाम लगने की स्थिति पैदा नहीं होगी। लोग चौक से घूमते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से बनाए जाने वाले फ्लाईओवर का खर्चा सैकड़ों करोड़ है, जबकि उनके द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव सिर्फ 60 करोड़ में पूरा हो सकता है।
इंजीनियरिंग विभाग ने सर्वे रिपोर्ट देने से किया इंकार
बैठक में ट्रिब्यून चौक पर चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट मांगने को लेकर भी काफी बहसबाजी हुई। तरुण माथुर ने प्रशासन से सर्वे रिपोर्ट मांगी, जिसे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने देने से मना कर दिया। तरुण का तर्क था कि अगर उन्हें सर्वे रिपोर्ट दिया जाता है तो उनके प्रोजेक्ट को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी जबकि इंजीनियरिंग विभाग का कहना था कि वह प्रशासन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर सकते।
हालांकि इसको लेकर भी अधिकारियों में दो मत रहे। कुछ अधिकारियों का कहना था कि सर्वे रिपोर्ट देने में कोई नुकसान नहीं है। बैठक की वीडियोग्राफी कराने को लेकर भी काफी बहस हुई। इन सबसे नाराज होकर पंजाब के चीफ इंजीनियर बैठक छोड़कर चले गए। कुछ देर बाद यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद भी फोन आने की बात कहकर बैठक से चले गए।