चंडीगढ़। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने संगरूर के उपायुक्त को 18 नवंबर को व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया। यह आदेश 84 लाख रुपये का हर्जाना जमा न कराने और डंपिंग ग्राउंड पर लिगेसी वेस्ट जमा होने के कारण दिया गया है।
ट्रिब्यूनल ने संगरूर नगर परिषद की नियमों के अनुपालन में बार-बार हुई चूक पर गंभीर चिंता जताई। एनजीटी ने जिला प्रशासन से कचरा प्रबंधन के लगातार बने संकट पर जवाबदेही तय करने को कहा। एनजीटी की मुख्य बेंच की अध्यक्षता न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद ने की।
बेंच ने जिम्मेदारी पूरी न कर पाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह कार्रवाई संगरूर के वकील कमल आनंद की दायर याचिका के बाद शुरू हुई, जिसमें म्युनिसिपल सॉलिड-वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरण को हो रहे नुकसान से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।