चंडीमंदिर। अमरावती पुल को लेकर शुरू हुए अमर उजाला के अभियान का असर अब आसपास के गांवों तक पहुंचने लगा है। इस बार आवाज केवल अमरावती की नहीं, बल्कि क्षेत्र के गांवों के लोगों ने भी बुलंद की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह केवल एक पुल का मामला नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी पंचकूला जिले की लाइफलाइन का सवाल है। बढ़ती आबादी, नए आवासीय प्रोजेक्ट और लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक के बीच अब दूसरा संपर्क मार्ग बनाना प्रशासन की मजबूरी बन चुका है।
लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय पुल पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम हो गया है। स्कूल बसें, एंबुलेंस, कर्मचारियों और उद्योगों के वाहन एक ही पुल पर निर्भर हैं। यदि किसी दिन पुल पर मरम्मत या कोई हादसा हो जाए तो पूरे इलाके का शहर से संपर्क प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को केवल सर्वे तक सीमित न रहकर निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। सोहनलाल, जयपाल, पम्मी, गुरदीप, गुस्चरन सिंह, कालाराम, देवराज, हरपाल, गाेविंद, विक्की, चिंटा, नेहा, सहित अन्य क्षेत्रवासियों से मांग की है कि प्रशासन दूसरे पुल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की समय-सीमा तय करे और निर्माण का रोडमैप सार्वजनिक करे। उनका कहना है कि जिस गति से उत्तरी क्षेत्र में विकास हो रहा है, उसी गति से आधारभूत ढांचे का विस्तार भी जरूरी है।
-कोटहर साल आबादी और ट्रैफिक बढ़ रहा है, लेकिन संपर्क का रास्ता वही पुराना है। दूसरा पुल अब सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। प्रशासन को इसकी घोषणा में और देरी नहीं करनी चाहिए। - बबली रावत, वाहन चालक
-बच्चों को स्कूल और मरीजों को अस्पताल ले जाते समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है। जाम में कई बार काफी देर तक फंसना पड़ता है। दूसरा संपर्क मार्ग बनने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। - आशा देवी, सुरजपुर
-अमरावती और आसपास लगातार नई हाउसिंग परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। यदि अभी से वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में हालात संभालना मुश्किल होगा। - जसबीर सिंह
-प्रशासन को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध योजना जारी करनी चाहिए। लोगों को यह पता होना चाहिए कि दूसरा पुल कब स्वीकृत होगा और निर्माण कब शुरू होगा।- शमसेर सिंह, प्रधान अमरावती एसोसिएशन