करोड़ों की सड़कों पर पानी निकासी का इंतजाम नहीं, राहगीरों और सैलानियों के लिए बढ़ा हादसे का खतरा
सड़क पर जमा बजरी-मलबा और झाड़ियां बनीं परेशानी, स्थायी समाधान पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरनी। मोरनी की सड़कें अधिकारियों की लापरवाही के चलते बदहाल हो गई हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों पर पानी निकासी का पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बारिश का पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा बहाकर सड़क पर ला रहा है। इससे राहगीरों, वाहन चालकों और मोरनी घूमने आने वाले सैलानियों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है।
पहाड़ी क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए उचित ड्रेन और क्रॉस-ड्रेनेज की व्यवस्था जरूरी होती है, लेकिन कई सड़कों पर इसका अभाव नजर आ रहा है। बारिश होते ही पहाड़ों से बहकर आया मलबा सड़क पर जमा हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है।
हर बारिश के बाद वही समस्या
बारिश के बाद कई स्थानों पर बजरी और मलबा जमा होने के साथ गड्ढे भी बन गए हैं। सड़क किनारे उगी जंगली घास और झाड़ियों की कटाई नहीं होने से कई मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन भी दिखाई नहीं देते। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विभाग की ओर से बारिश के बाद कई जगह मलबा हटाया जाता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोरनी-पंचकूला, मोरनी-रायपुर रानी समेत अन्य प्रमुख मार्गों पर हर बरसात में यही स्थिति बनती है। इसके बावजूद ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
लोगों का सवाल है कि सड़क निर्माण के समय पानी निकासी की तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी थी। यदि डिजाइन या निर्माण में खामी है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
हादसा होने का इंतजार क्यों?
सड़क पर मलबा, बजरी, गड्ढे और झाड़ियां हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते स्थायी समाधान करना चाहिए।