मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मोरनी क्षेत्र को जैविक खेती के क्षेत्र में विकसित करने को लेकर लगातार गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। मोरनी के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती की ओर बढ़ाने और क्षेत्र को ऑर्गेनिक फार्मिंग के एक बेहतर मॉडल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री लगातार अधिकारियों और किसानों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 11 अगस्त को मोरनी स्थित भाऊ तकनीकी संस्थान में पहुंचेंगे, जहां वह क्षेत्र के किसानों से सीधे रूबरू होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री किसानों से जैविक खेती को लेकर चर्चा करेंगे तथा मोरनी में ऑर्गेनिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे।
खास बात यह है कि पिछले करीब दो महीनों के दौरान मुख्यमंत्री का यह दूसरा दौरा होगा, जिसमें वह मोरनी के किसानों के साथ बैठकर जैविक खेती को लेकर चर्चा करेंगे।
कृषि राज्य मंत्री भी लगातार कर रहे किसानों से संवाद
मोरनी में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्याम सिंह राणा भी लगातार किसानों के साथ बैठकें कर चुके हैं। इन बैठकों में कृषि विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे हैं। किसानों को जैविक खेती के फायदे, इसके बाजार, उत्पादन प्रक्रिया और सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सरकार का प्रयास है कि मोरनी के किसान रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए जैविक खेती को अपनाएं और अपने कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकें।
एमडीएच कंपनी के साथ किसानों को जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पहल पर मोरनी के किसानों को एमडीएच कंपनी के साथ भी जोड़ा गया है। शुरुआती चरण में क्षेत्र के करीब 85 किसानों के साथ जैविक खेती करवाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह खेती एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से करवाई जाएगी।
योजना के तहत किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बताया गया है कि बाद के चरण में कंपनी की ओर से एफपीओ से जुड़े किसानों को एक-एक लाख रुपये तक का अनुदान देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
मोरनी को जैविक खेती की नई पहचान दिलाने की तैयारी
मोरनी का पहाड़ी क्षेत्र प्राकृतिक वातावरण और कृषि के लिए अनुकूल परिस्थितियों के कारण जैविक खेती के लिए संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि यहां के किसानों को संगठित कर जैविक खेती का एक ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे किसानों की आमदनी बढ़े और मोरनी की पहचान जैविक कृषि क्षेत्र के रूप में भी बने।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जिस तरह लगातार मोरनी के किसानों के साथ संवाद कर रहे हैं और इस विषय को लेकर बार-बार बैठकें कर रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि वह इस योजना को लेकर व्यक्तिगत स्तर पर भी गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 11 अगस्त की बैठक को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस बैठक में किसानों की समस्याओं, जैविक खेती में आने वाली चुनौतियों, उत्पादन, मार्केटिंग और सरकार से मिलने वाली सहायता को लेकर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के लगातार प्रयासों से मोरनी के किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में क्षेत्र में जैविक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे।