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शहर में चल रहे 1000 से अधिक पीजी, अधिकारियों को पता नहीं

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पंचकूला। शहर में एक हजार से अधिक अवैध पीजी धड़ल्ले से चल रहे हैं। सरकार की नजरों से बचने के लिए पीजी संचालक पुलिस वेरिफिकेशन करवाना तक उचित नहीं समझते हैं। यही कारण है कि पुलिस और प्रशासन के पास शहर में कितने पीजी चल रहे हैं इसका कोई आंकड़ा नहीं है। न ही आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम ही उठाया गया है। इसी का लाभ उठाकर लोग मकान को पीजी में तबदील करके प्रतिमाह मोटी कमाई कर रहे हैं, जबकि यह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड के नियमों के खिलाफ है। ऐसा नहीं है कि प्राधिकरण के अधिकारियों को पीजी संचालन की खबर नहीं है लेकिन वह भी कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठा रहा है।
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नियमों को ठेंगा दिखाकर लोगों ने अपने मकान में छोटे-छोटे कमरे बनाकर 10-15 युवक और युवतियों को रखा हुआ है। शहर में सबसे अधिक पीजी का संचालन सेक्टर-5 स्थित बस स्टैंड, सेक्टर-4, सेक्टर-10, सेक्टर-15 हाउसिंग बोर्ड के मकान, सेक्टर-9, सेक्टर-11, सेक्टर-18 हाउसिंग बोर्ड चौक, सेक्टर-7 में हो रहा है। संचालक पीजी में रहने वाले युवक और युवतियों से प्रतिमाह पांच से छह हजार रुपये वसूल रहे हैं। कुल मिलाकर एक घर में यदि 10 पीजी चल रहा है तो मकान मालिक को प्रतिमाह 30 से 60 हजार रुपये की कमाई हो रही है। लेकिन इस कमाई का सरकार के पास कोई हिसाब नहीं है।
संचालक नहीं करवाते हैं रेंट एग्रीमेंट
अधिकांश पीजी संचालक रेंट एग्रीमेंट करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता है कि पीजी में रहने वाले युवक-युवती कब छोड़कर चले जाएं। इस लापरवाही का फायदा शरारती तत्व भी उठाते हैं। यही कारण है कि शहर में पीजी में कई बड़ी वारदात भी हो चुकी है। क्योंकि पीजी का रास्ता बाहर और आने-जाने का कोई समय भी निर्धारित नहीं होता है। ऐसे में संचालक को यह नहीं पता चल पाता है कि रात में कोई ठहरा था। संचालक को पूरा फोकस सिर्फ कमाई पर होता है। इसी का फायदा कई बार शरारती तत्व भी उठाते हैं।
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हाउसिंग बोर्ड के मकानों में सबसे ज्यादा पीजी
सेक्टर-10 स्थित हाउसिंग बोर्ड के मकानों में सबसे ज्यादा पीजी संचालित हो रहे हैं। यह सेक्टर बस स्टैंड के नजदीक और शहर के मध्य में है। इस सेक्टर में हर सुविधा उपलब्ध है। मात्र 90 गज के मकान को तीन-तीन मंजिला बनाकर 10-10 पीजी चलाए जा रहे हैं। एक-एक घर के बाहर पांच से 10 बाइक खड़े देखे जा सकते हैं। सारी रात इन घरों में आना-जाना लगा रहता है। वहीं अगर किसी मकान मालिक द्वारा पूछताछ या रोकटोक की जाती है तो पीजी भी यह दखल बर्दाश्त नहीं करते हैं। यही वजह है कि इस सेक्टर के पीजी में लड़ाई-झगडे़ के मामले भी हो चुके हैं। जिला पंचकूला पुलिस और जिला प्रशासन को इस अवैध धंधे पर सख्त कार्रवाई कर रोक लगानी चाहिए।
कोट्स
अभी तक किसी भी विभाग की ओर से जांच के आदेश नहीं मिले हैं। यदि विभाग को जांच के आदेश जारी होंगे तो इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। आज तक किसी भी पीसी संचालक ने किसी तरह की कोई परमिशन नहीं ली है। एसएस मलिक, फायर ऑफिसर पंचकूला।
कोट्स
पंचकूला में पीजी का संचालन हो रहा है। इसकी विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। न ही इसके लिए कोई पॉलिसी है। किसी भी घर के बाहर पीजी का बोर्ड भी नहीं लगा है। ऐसे में हर घर को चेक करना बहुत मुश्किल है। जब भी कहीं से कोई शिकायत मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाती है। विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
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एमपी शर्मा, एसडीओ एचएसवीपी
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