चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक किशोर को जमानत देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों को वयस्कों की तरह अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने का अधिकार है।
हाईकोर्ट के समक्ष किशोरों की जमानत से जुड़ी बहुत सी याचिकाएं विचाराधीन थीं और इन में सुनवाई के दौरान विभिन्न विरोधाभासी आदेशों का हवाला दिया गया था। 33 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब वयस्कों को गिरफ्तारी की आशंका के आधार पर सीआरपीसी की धारा 438 के तहत संरक्षण प्रदान किया जाता है, तो किशोर को गिरफ्तारी का खतरा होते हुए उसे धारा 438 सीआरपीसी के प्रावधानों के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
बेंच ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम में गिरफ्तारी शब्द का उपयोग नहीं करने की बात कही गई है। गिरफ्तारी शब्द नाबालिग के नाम के साथ न जुड़े इसलिए कुछ प्रावधान किए गए हैं, लेकिन इनके आधार पर उसे अग्रिम जमानत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस सब को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने किशारों की सभी लंबित अग्रिम जमानत याचिकाओं को मंजूर करते हुए यह आदेश जारी किया है।