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टीडीआर के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंडों की शर्ते खत्म

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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) जारी करने के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंड की शर्तों को खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। सरकार ने विकास योजना क्षेत्र में भूमि एकत्रीकरण, बाह्य विकास कार्यों एवं आधारभूत संरचना के विकास के लिए टीडीआर जारी करने और उपयोग की नीति को मंजूरी दी है।
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मंत्रिमंडल ने 25 जून 2018 को हुई बैठक में इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे थे। उसके बाद पहली जुलाई 2019 को नीति के मसौदे को स्वीकृति प्रदान की। 30 अगस्त 2019 तक प्राप्त आपत्तियों, सुझावों की जांच की गई। 14 जनवरी 2020 को टीडीआर नीति में उपयुक्त संशोधन किए गए। 5 अगस्त 2021 को प्रस्तावित टीडीआर नीति मंजूर करने का एजेंडा मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया।
बहरहाल, सेक्टरों के प्लान रोड पॉकेट्स (एसपीआरपी) और सेक्टर रोड एंड ग्रीन बेल्ट्स (एसआरजीबी) के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंडों सहित अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद एजेंडा को टाल दिया था। इस तरह के विचार-विमर्श के आधार पर अब एसपीआरपी और एसआरजीबी लैंड पॉकेट के खिलाफ टीडीआर आवेदन के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंड को हटा दिया गया है।
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अन्य निर्णय
मंत्रिमंडल बैठक में चिरलंबित बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) के बकायों की वसूली को सक्षम बनाने के लिए संशोधित ‘समाधान से विकास’ योजना को स्वीकृति दी गई। नीति के तहत 30 सितंबर 2021 तक 1130.13 करोड़ रुपये वसूल किए हैं। वर्तमान में कॉलोनाइजर, डेवलपर्स की ओर से करीब 14932.87 करोड़ रुपये की ईडीसी बकाया है। बकाया में 7965.17 करोड़ रुपये मूलधन है, जबकि 1606.43 करोड़ रुपये ब्याज राशि और 5361.27 करोड़ रुपये दंड ब्याज राशि है। 30 सितंबर 2021 के बाद योजना आगे नहीं बढ़ाई गई।
खनन से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एकमुश्त निपटान योजना को मंजूरी दी गई है। पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने से पहले की अवधि के लिए देय राशि और संचालन के लिए सहमति बनी है। इसके अलावा खनन ठेकेदारों की समस्याओं का समाधान होगा।
मंत्रिमंडल ने सर्वे ऑफ इंडिया व सरकार के बीच हुए एमओयू में संशोधन को मंजूरी दी है। अब सर्वे ऑफ इंडिया खुद उपकरण खरीद कर सकेगा। खरीद पर होने वाला खर्च सरकार वहन करेगी। इससे मैपिंग, जनरेशन कामों में तेजी आएगी।
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