चंडीगढ़। केंद्र सरकार की ओर से गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने से बंदरगाहों पर व्यापारियों का लाखों मीट्रिक गेहूं अटक गया है। इसके अलावा, रेलवे और ट्रकों के माध्यम काफी मात्रा में अनाज रास्तों में है। भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अब इस अनाज के खराब होने की आशंका बढ़ने लगी है, जिससे व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है। इसके अलावा, विदेशों से हुए करार भी टूट रहे हैं। इसको देखते हुए भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है 13 मई तक जो गेहूं कांडला और मुंबई बंदरगाह पर भेजा गया, उसको रोक दायरे से बाहर रखा जाए और अनाज को निर्यात करने के लिए एक माह का समय दिया जाए।
राष्ट्रीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि गेहूं के नियमित निर्यात के तहत ही व्यापारियों द्वारा पूर्व की भांति विदेशों से गेहूं निर्यात के सौदे किए गए थे। इस कड़ी में व्यापारियों ने सीधा अन्नदाताओं से संपर्क करते हुए उनसे सरकारी भाव से अधिक दाम चुकाते हुए अनाज की खरीद की थी। 13 मई, 2022 को ही केंद्र सरकार द्वारा गेहूं निर्यात पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए जाने के बाद यह सौदे अधर में लटक गए हैं। देश में व्यापारियों के हजारों ट्रक अनाज अनलोड होने के लिए इन बंदरगाहों पर खड़ा है। केंद्र सरकार के नए आदेशों के आधार पर निर्यातक अपने सौदे रद्द करके वापस ले रहे हैं, जिससे व्यापारी बर्बादी की कगार पर पहुंच रहा है। जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील है कि वो आर्थिक व व्यवहारिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 13 मई तक बंदरगाह तक पहुंच चुके तथा परिवहन व्यवस्था में जा रहे गेहूं के निर्यात के लिए एक माह का समय देें।