फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपराधी के ठिकाने की जानकारी होना मात्र उसे शरण देने का अपराध नहीं : हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अपराधी के ठिकाने के बारे में जानकारी होने भर से अपराधी को शरण देने का अपराध नहीं बनता है, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि अपराधी को गिरफ्तारी से बचने में मदद की गई है।
इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया। याचिका दाखिल करते हुए फगवाड़ा निवासी चमन लाल ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके बेटे हरीश कांडा व बहू पूजा के बीच वैवाहिक विवाद था और बेटे के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया था। शिकायतकर्ता बहू ने आरोप लगाया कि याची अपने बेटे के लिए आश्रय की व्यवस्था कर रहा था। ऐसे में याची के खिलाफ अपराधी को शरण देने का मामला दर्ज किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा कि अपराधी के ठिकाने के बारे में केवल जानकारी होना तब तक शरण देने के बराबर नहीं है, जब तक कि अभियुक्त ने अपराधी को गिरफ्तारी से बचने में मदद करने के लिए कुछ न किया हो। जहां तक संबंधित दस्तावेज का सवाल है, यह केवल दर्शाता है कि याचिकाकर्ता और हरीश कांडा एक बैंक खाते के संयुक्त धारक थे। हालांकि, यह दस्तावेज केवल वर्ष 2007-2008 के दौरान लेनदेन दर्शाता है। इस दस्तावेज से भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि याचिकाकर्ता किसी भी तरह से अपने बेटे की सहायता कर रहा था, या वर्ष 2023 के बाद उसे आर्थिक रूप से सहायता कर रहा था। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें