पंचकूला। लघु सचिवालय के सभागार में मंगलवार को सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के बेहतर कार्य के लिए गठित जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की तीसरी बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने की। उन्होंने कालका, रायपुररानी और पिंजौर में मौजूदा सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों की फिजिकल वेरिफिकेशन के कार्य को तय समय अवधि से पहले पूरा करने के लिए अधिकारियों की प्रशंसा की। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अनुराग गोयल द्वारा बागवानी, कृषि व सिंचाई विभाग के अधिकारियों की एक समिति का गठन किया। समिति के सदस्यों द्वारा कालका, रायपुररानी और पिंजौर में करीब 300 एकड़ भूमि पर लगे सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों की जांच की गई। इसमें पाया कि अधिकांश सूक्ष्म सिंचाई यंत्र क्रियाशील हैं।
पंचकूला ऐसा पहला जिला है, जिसने दूसरे जिलों की अपेक्षा सबसे पहले सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उपायुक्त ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई राज्य सरकार की अहम प्राथमिकताओं में से एक है। उपायुक्त ने कृषि, बागवानी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला सिंचाई योजना के लिए अपने सुझाव जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति के सदस्य सचिव को दो सप्ताह के अंदर भिजवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला सूक्ष्म सिंचाई योजना तीन वर्षों के लिए बनाई जानी है और जमीनी स्तर पर इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक संसाधन जैसे मैन पावर इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत इस वर्ष लक्ष्य को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए, ताकि जिले में अधिक से अधिक भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया जा सके। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशु सिंघल, सिंचाई विभाग के मुख्य कार्यकारी अभियंता अनुराग गोयल व कृषि व बागवानी विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।