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पंजाब : निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों को लग सकता है बड़ा झटका, मिल सकते हैं नए प्रतिद्वंद्वी

Tue, 19 Jan 2021 01:32 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब निकाय चुनाव। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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पंजाब में आठ नगर निगम और 109 नगर परिषदों के चुनाव को लेकर सक्रिय हुई सभी राजनीतिक दलों को इस बार जोर का झटका लगने के आसार बनने लगे हैं। अब तक विभिन्न समाज जहां इन राजनीतिक दलों से अपने हितों के लिए वोट के बदले कई तरह की मांगें रखते थे, इस बार खुद ही अपने-अपने समाज के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। 

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अरोड़ा, बहावलपुर, खत्री समाज ने खुले तौर पर इस बाबत एलान भी कर दिए हैं जबकि कांग्रेस से नाराज चल रहे वाल्मीकि समाज ने भी अपने प्रत्याशी उतारने के संकेत दिए हैं। इसका सीधा असर राजनीतिक दलों के वोट बैंक के गणित पर पड़ना तय है।


भारतीय बहावलपुर महासंघ की तरफ से सभी सियासी पार्टियों को फिक्स कोटे के तहत टिकट देने की मांग की गई है। साथ ही यह साफ कर दिया गया है कि अगर सियासी पार्टियां बहावलपुर और अरोड़ा समाज के नुमाइंदों को टिकट नहीं देंगी तो महासंघ पंजाब भर में अपने उम्मीदवार खड़े करेगा। महासंघ का यह भी कहना है कि कांग्रेस और अकाली दल की तरफ से कुछ सीटें उनके समाज को देने का फैसला लिया गया है लेकिन समाज की आबादी को देखते हुए ये सीटें काफी कम हैं। 
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भारतीय बहावलपुर महासंघ के राष्ट्रीय सीनियर उप प्रधान शाम लाल वधवा ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद बहावलपुर और अरोड़ा समाज के लोग बड़ी संख्या में पंजाब में आकर बस गए थे। अपने समाज की मांग को देखते हुए बहावलपुर महासंघ समाज सेवा के साथ-साथ सक्रिय सियासत में भी भाग लेगा। उन्होंने सभी सियासी दलों से कम से कम 25 सीटें देने की मांग की है। अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो महासंघ अपने उम्मीदवार मैदान में उतार देगा। 

खत्री समाज ने भी सियासी दलों से चुनाव में प्रतिनिधित्व मांगा है। खत्री समाज के पदाधिकारियों ने मांग की है कि उनकी आबादी वाले इलाकों में खत्री प्रत्याशी को टिकट दी जाए, अन्यथा समाज अपने प्रत्याशी चुनाव में उतारेगा।

वाल्मीकि समाज की कांग्रेस से नाराजगी बढ़ी
इस बीच, पंजाब का वाल्मीकि समाज सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी से नाराज है। उनकी नाराजगी का कारण, कांग्रेस द्वारा बोर्ड-निगमों की चेयरमैनी में वाल्मीकि समाज को अनदेखा किया जाना है। समाज की 15 विभिन्न संस्थाओं ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से एडवोकेट अश्विनी बगानिया को चेयरमैन बनाए जाने की मांग की थी। 

मुख्यमंत्री ने यह मांग स्वीकार भी कर ली और बगानिया को दलित विकास बोर्ड का चेयरमैन भी नियुक्त कर दिया गया लेकिन नियुक्ति पत्र जारी करने के तुरंत बाद ही इस पत्र को रदद करते हुए किसी अन्य व्यक्ति को चेयरमैनी सौंप दी गई। इससे वाल्मीकि समाज खासा नाराज है। वाल्मीकि समाज के पदाधिकारियों ने फिलहाल कांग्रेस को अल्टीमेटम दे दिया है, जिस पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो समाज अपने नुमाइंदों को चुनाव में उतारेगा।

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