चंडीगढ़। सुबह पांच बजे उठना। घर के पास ग्राउंड में दौड़ना, फिर एक्सरसाइज करना। इसके बाद घर आकर दही व फलों का जूस लेना। दोपहर को अंकुरित अनाज से बनी रोटी और शाम को चार बजे फल। शाम को फिर सैर पर निकलना और शाम सात बजे खाना खाकर जल्दी सो जाना। यह दिनचर्या है प्राइड ऑफ सिटी वेटर्न एथलीट मान कौर की। 103 साल की उम्र में भी मान कौर कितनी फिट हैं, यह बात उनसे मिलते ही समझ में आ जाती है।
सोमवार को संवाददाता संजीव पंगोत्रा ने उनसे सफलता का राज पूछा तो उन्होंने ठेठ पंजाबी में अपनी जिंदगी के फलसफे को साफ कर दिया। बोलीं-बंदे विच जित्तण दा जज्बा होणा चाहिदा है, उम्र पामे कोई वी हो, कोई फरक नीं पैंदा। गल्ल शुरुआत करण दी ए।
सेक्टर 40 में मान कौर का परिवार रहता है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सम्मानित किया। मोदी से मुलाकात के सवाल पर मान कौर ने कहा कि मुझे जब यह सूचना मिली तो मारे उत्साह के रात भर नींद नहीं आई। 29 अगस्त को दिल्ली पहुंची और वो लम्हा आ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैं रूबरू थे। मुझे फिट देखकर वे न केवल हैरान हुए बल्कि खुशी जताते हुए उनके मुंह से निकला शाबाश। मेरे हाथ बरबस ही जुड़ गए तो मोदी ने तुरंत मेरे हाथों को पकड़ा और कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए। मेरा हृदय स्नेह से भर गया। उम्र के इस पड़ाव पर मिला यह सम्मान मेरे जीवन की अनमोल यादों में शरीक हो गया। यह लम्हा वह कभी नहीं भूल सकतीं। फिट इंडिया के इस कार्यक्रम में शिरकत करके मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं चाहती हूं कि उम्र भले ही कितनी भी हो, लोग अपनी फिटनेस से समझौता न करें।
सफलता का सफर जो अभी तक जारी है...
मान कौर का ड्राइंग रूम उनकी तस्वीरों से भरा पड़ा है। उनसे जुड़ी तमाम यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं। अपने सफर की शुरुआत के बारे में बताती हैं कि बात 2009 की है। मेरा बेटा गुरदेव सिंह रोजाना पंजाब यूनिवर्सिटी में दौड़ लगाने जाता था। मैं भी बेटे के साथ वहां जाने लगी। युवाओं को ग्राउंड में दौड़ते देख मुझे न जाने क्यों यह ख्याल आया कि दौड़ना शुरू करना चाहिए। रोजाना थोड़ा थोड़ा दौड़ने लगी। मेरी अच्छी रनिंग देख बेटे मुझे मास्टर एथलीट टूर्नामेंट में खेलने के लिए प्रेरित किया। 2010 में पहली बार नेशनल एथलीट में हिस्सा लिया और 100 मीटर व 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद हौसला बढ़ गया और दौड़ का यह अंतहीन सिलसिला जारी है।
योग और सैर हैं मान कौर की फिटनेस के राज
मान कौर के 81 साल के बेटे गुरदेव सिंह बताते हैं कि वह अपनी मां के साथ देश और विदेशों में होने वाली मास्टर्स एथलीट प्रतियोगिताआें में नियमित रूप से हिस्सा लेते आ रहे हैं। 63 वर्ष की बेटी अमृत कौर बताती है कि अपनी मां को इस उम्र में इतना फिट देखते हुए पूरा परिवार उनसे प्रेरणा लेता है। हमने कितनी ही लड़कियों को उनसे फिटनेस के टिप्स लेते देखा है। वे सबसे यही कहती हैं कि नियमित रूप से सैर और योग ही सेहतमंद रहने के सूत्र हैं।
पति के जाने से जिंदगी में सूनापन आया मगर मैं कमजोर नहीं पड़ी
मान कौर बताती हैं कि मेरे पति रणजीत सिंह 102 वर्ष के थे, जब इस दुनिया से विदा हो गए। हम दोनों कई किलोमीटर तक वॉक करते थे। उनके जाने के बाद एक सूनापन जिंदगी में जरूर आया लेकिन मैंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। एक न एक दिन तो सबको यहां से जाना ही है। मैं खुश हूं कि लोग मुझे सम्मान देते हैं। प्यार देते हैं। आजकल लोगों में पैदल चलने की आदत छूटती जा रही है। इसके चलते स्टेमिना भी घटता जा रहा है।
एशियन गेम्स में पदक अगला टारगेट
अगले लक्ष्य के बारे में पूछने पर मान कौर ने बताया कि किसी भी कंपीटीशन के लिए हमेशा तैयार रहती हूं। दिसंबर में मलयेशिया में एशियन गेम्स का हिस्सा रहूंगी। अगले साल कनाडा में एथलीट मीट में शिरकत करूंगी। फिलहाल इनकी तैयारियों में ही जुटना है। मैं चाहती हूं कि यहां से भी पदक जीतकर लाऊं।
सवाल जरा हटकर
बेटियां परिवार की शान होती हैं..मॉडर्न बनें मगर मर्यादा न तोड़ें
चंडीगढ़ में लड़कियों के साथ होने वाली घटनाओं से मान कौर भी व्यथित हो जाती हैं। कहती हैं कि आज भी लड़कियों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर चलते समय उनके साथ छेड़खानी या अपहरण फिर रेप जैसी भयावह घटनाएं होती हैं। पुरुषों की सोच में आज भी बदलाव नहीं आया है। पैरेंट्स आज भी अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। भले ही वह परिवार कितने ही मॉडर्न हों। हां एक बात जरूर कहूंगी कि लड़कियों को मॉडर्न जरूर होना चाहिए लेकिन अपनी मर्यादा नहीं तोड़नी चाहिए। मुझे दुख होता है जब पता चलता है कि करिअर बनाने की उम्र में लड़कियां नशे की लत में फंस जाती हैं।
तो यह है मान कौर की फिटनेस का मंत्र
मान कौर बताती हैं कि उनकी उम्र के लोग अब शायद दुनिया में इक्का दुक्का ही बचे होंगे। लंबी उम्र का राज पूछने पर वे कहती हैं कि यह सब परमेश्वर की कृपा है। हालांकि अपने खान पान को लेकर वह हमेशा सजग रहती हैं। तीस साल से भी ज्यादा हो गए हैं, तला हुआ खाना नहीं खाया। जब आप खेल से जुड़ जाते हैं तो बीमारियां आपके पास भी नहीं फटक सकतीं। साधारण खाना ही लेती हूं। कितनी ही बार तो मैं खुद ही अपने लिए खाना बनाकर खाती हूं। आज भी मुझे कुकिंग करना अच्छा लगता है। मैं कभी खाली नहीं बैठ सकती।
युवाओं को क्या संदेश देंगी
यूथ के लिए यही कहना चाहूंगी कि भले ही आप कितने ही व्यस्त हों, एक्सरसाइज के लिए वक्त जरूर निकालें। जंक फूड से तौबा करें। नशों से नाता तोड़ें, खेलों से जीवन को जोड़ें। क्योंकि शरीर स्वस्थ रहेगा तो दिमाग भी स्वस्थ रहेगा। सादा जीवन, उच्च विचार की जीवन शैली को अपनाएं।
मान कौर की उपलब्धियां
कनाडा में 2013 के अंत में मास्टर्स चैंपियनशिप में 100 मीटर, 400 मीटर, 200 मीटर, गोला फेंकऔर जेवलिन थ्रो में हिस्सा लेते हुए कुल 5 गोल्ड जीते।
अमेरिका- 2013 में ही वर्ल्ड सीरीज गेम्स में मान कौर ने 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, शॉटपुट, जेवलिन थ्रो में हिस्सा लेते हुए कुल 5 गोल्ड मेडल जीते।
अमेरिका - 2011 में यूएसए में अंतरराष्ट्रीए एथलेटिक्स मीट में भाग लेते हुए ने केवल वर्ल्ड रिकार्ड कायम किया इसके साथ ही एथलीट ऑफ द यीअर के खिताब से भी नवाजी गई। मान कौर भारत की पहली वेटरन खिलाड़ी हैं जिसे यह खिताब मिला है।
न्यूजीलैंड - 2017 में ऑकलैंड में हुए वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में 100 मीटर रेस को मान कौर ने 14 सेकेंड में पूरा कर नया रिकार्ड बनाते हुए गेाल्ड जीता। इसके साथ ही 200 मीटर रेस, शॉट पुट, जेवलिन थ्रो में भी गोल्ड जीता था।