चंडीगढ़। अब सुनहरे पर्देे पर आपको पंजाब के धुरंधर बॉक्सर की संघर्ष की कहानी दिखाई देगी। यह बाक्सर हैं कौर सिंह, जिन्होंने ओलंपिक में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और नामचीन मुक्केबाज मोहम्मद अली के साथ मुक्केबाजी भी की।
चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कौर सिंह ने अपने संघर्ष पर आधारित मूवी की घोषणा के दौरान बताया कि वास्तव में उनका संघर्ष लंबा रहा। कौर सिंह का जन्म संगरूर के खनाल खुर्द में हुआ था। पंजाब के मालवा रीजन के एक छोटे से किसान परिवार के कौर सिंह ने 1979 को भारतीय सेना ज्वाइन की। उन्होंने एक हवलदार के रूप में सेना में महज 23 वर्ष की अवस्था में ज्वाइन किया। उनको उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल से नवाजा गया। उनकोे विशिष्ट सेना मेडल से 1988 में नवाजा गया।
कौर सिंह ने बताया कि बचपन से ही वह बाक्सिंग में रुचि रखते थे। उस समय की बाक्सिंग और अब की बाक्सिंग में काफी अंतर है। वर्ष 1979 में उन्होंने एक गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने यह मेडल सीनियर नेशनल बाक्सिंग चैंपियनशिप में जीता। उन्होंने लगातार चार साल यह खिताब जीता। कौर सिंह ने बताया कि हर मेडल उनको उत्साह देता था। इसके बाद कौर सिंह ने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप के दौरान मुंबई में गोल्ड मेडल जीतकर देश का हौसला बढ़ाया। कौर सिंह ने कहा कि एशियन चैंपियनशिप की जंग उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रही। वर्ष 1982 में कौर सिंह ने एशियन गेम्स की हैवीवेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता। इसी वर्ष उनको मिनिस्ट्री आफ यूथ अफेयर्स द्वारा अर्जुन अवार्ड प्रदान किया गया। कौर सिंह ने बताया कि उनको वर्ष 1983 में भारत सरकार ने उनको पद्मश्री अवार्ड से नवाजा। उन्होंने बताया कि उन्होंने लॉस एंजिल्स में उन्होंने प्रतिभागिता की और हार गए पर हमेशा दिल यही कहता रहा कि देश को ओलंपिक में बाक्सिंग में मेडल मिलना चाहिए।
ऐसे बनी फिल्म की योजना...
इस फिल्म में कौर सिंह का किरदार करम बाथ निभा रहे हैं। कौर सिंह के डायरेक्टर और लेखक विक्रम प्रधान ने बताया कि इस मूवी का प्लान उन्होंने कौर सिंह से मुलाकात के दौरान तैयार किया था। उन्होंने बताया कि सात आठ बार उनके साथ मिले और उसके बाद स्क्रिप्ट में उसको किया।