फूल तो दो दिन बहारे जां फिजा दिखला गए, हसरत उन गुंचों पे है जो बिन खिले मुरझा गए...। जौंक साहब की ये लाइनें हरियाणा में फूलों के उन रहनुमाओं पर सटीक बैठती हैं जो इस वक्त भारी आर्थिक दिक्कत से गुजर रहे हैं। लॉकडाउन में फूल उत्पादकों की खेती और कारोबार समक्ष एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है। आलम यह है कि खेत तो फूलों की महक से लहलहा रहे हैं, मगर फूलों की मंडी में कोई खरीददार नहीं दिख रहा।
फूल उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले नवरात्र लॉकडाउन की वजह से मंदी की चपेट में निकल गया। अप्रैल में दस से ज्यादा शादियों के मुहूर्त हैं, लेकिन सभी के ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। दस दिनों में हरियाणा में फूलों की खेती करने वाले किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। किसान हरियाणा की ओर मदद की आस ले देख रहे हैं।
फूलों की खेती करने वाले किसान शंकर, दिनेश, सतीश और अनिल कुमार का कहना है कि भले ही उनकी खेती टुकड़ों में छोटे स्तर पर होती है। साल में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो कमाई के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उनमें नवरात्र और शादियों के दिन शामिल है। मगर इस बार ऐसा कुछ नहीं है। फूल उत्पादकों ने सीएम मनोहर लाल से मांग की है कि उनके खेतों और उनके हालातों का जायजा लेते हुए सरकार फूल उत्पादकों को मुआवजा दे, ताकि वे अपना गुजर बसर कर सकें।
खेतों में ही बर्बाद किये जा रहे फूल
सूबे में गुरुग्राम, पानीपत, करनाल, सोनीपत, अंबाला, कुरुक्षेत्र, जींद, भिवानी, झज्जर व यमुनानगर जिलों में फूलों की खेती अधिक की जाती है। वैसे तो यहां गेंदे और गुलाब के फूल की ज्यादा खेती होती है। मगर जरबेरा, लिली, आर्केट, एंथोरियम व कारनेशन के फूलों की खेती भी कहीं-कहीं जगह किसान करते हैं।
किसान शंकर ने बताया कि मजबूरन किसानों को खेतों में लहलहा रहे फूलों को तोड़कर उन्हें एक जगह फेंकना पड़ रहा है। ताकि फूल सड़ कर मिट्टी में ही खत्म हो जाएं। यदि ऐसा नहीं करते तो पौधा भी खराब हो जाता है। दिनेश ने बताया कि फूल उत्पादक रोजाना की कमाई पर आश्रित हैं।
दूसरे राज्यों से फूलों की बढ़ी आवक, बड़ा कारोबार
हरियाणा में कोलकाता, मदुरई, दिल्ली, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के भी कुछ शहरों से फूलों की सप्लाई होती है। इन फूलों में डेलिया, जैसमीन, आर्केट, कारनेशन इत्यादि फूल शामिल हैं। इन फूलों का भी हरियाणा में बड़े स्तर पर कारोबार होता है। इन फूलों का ज्यादातर इस्तेमाल शादियों, पार्टियों व अन्य अवसरों पर सजावट में किया जाता है। यह ठप पड़ा है और बाहरी राज्यों से भी फूलों की आपूर्ति नहीं हो रही है।