चंडीगढ़। शहर में लागू पंजाब न्यू कैपिटल पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट 1992 को हटाने के लिए हल्लोमाजरा के दीप कांप्लेक्स निवासी बीएस रावत ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने संसद द्वारा पास किए गए बिल ऑफ प्रॉपर्टी राइट्स (मालिकाना हक के लिए) विधेयक को चंडीगढ़ में लागू करने की मांग की है। रावत ने पत्र की एक कॉपी गृहमंत्री अमित शाह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को भी भेजी है।
शहर में लाल डोरा के बाहर रहने वाले लोगों के लिए लाल डोरा एक बड़ी समस्या है। लाल डोरा के बाहर रहने वाले लोग चुनाव में वोट तो डाल सकते हैं लेकिन उनके द्वारा चुना गया नेता उनके क्षेत्र में विकास का कोई भी कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने पहले लाल डोरे के बाहर रहने वाले लोगों के विकास के लिए कदम उठाने की कोशिश की लेकिन सभी असफल ही रहे हैं। बीएस रावत ने बताया कि 22 दिसंबर 1992 को लाल डोरा का विस्तार करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष तत्कालीन वित्त सचिव एसएस बराड़ थे। कमेटी ने लाल डोरा के बाहर रहने वाले लोगों की जरूरतों की भी जांच की। कमेटी ने सुझाव भी देना था लेकिन इस पर कुछ भी नहीं हो पाया है।
चंडीगढ़ को विधानसभा बनाने की अनुमति दे केंद्र सरकार: रावत
रावत ने मांग की है कि पंजाब न्यू कैपिटल पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट 1992 को समाप्त किया जाए और चंडीगढ़ में बिल ऑफ प्रॉपर्टी राइट्स को लागू करना चाहिए। यह विधायक संसद द्वारा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की 1731 अनाधिकृत कालोनियों के हित में पास किया गया है ताकि लाल डोरा के बाहर के निवासियों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि केंद्र सरकार मकानों को नियमित करने में असमर्थ है तो चंडीगढ़ को विधानसभा बनाने की अनुमति प्रदान की जाए ताकि स्थानीय विधानसभा सदस्य लाल डोरे के बाहर रह रहे लोगों को राहत प्रदान कर सकें। विधानसभा के बनने से कई समस्याओं का स्थानीय स्तर पर ही समाधान हो सकेगा।