पंचकूला में सात एकड़ जमीन बेचने का सौदा कर 50 लाख रुपये लेने के बाद रजिस्ट्री नहीं कराने के मामले में आरोपी विक्रम सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली।
पंचकूला की अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने माना कि अग्रिम जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है।
आरोपी के खिलाफ रायपुररानी थाने में 12 मई 2026 को मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता दीपक कुमार ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2023 में विक्रम सिंह और राम कुमार ने गांव गोबिंदपुर में सात एकड़ जमीन अपनी बताते हुए 35 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सौदा किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने अलग-अलग माध्यमों से आरोपियों को 50 लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन बाद में पूरी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
दूसरों से भी कर रखे थे जमीन के सौदे
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने इसी जमीन को लेकर अन्य लोगों के साथ भी बिक्री समझौते किए थे। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में जमीन के स्वामित्व की स्थिति भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम सिंह के पास 25 कनाल एक मरला, इंदर सिंह के पास पांच कनाल 11 मरला और परमजीत कौर के पास चार कनाल जमीन थी। इसके बावजूद शिकायतकर्ता से सात एकड़ जमीन का सौदा किया गया।
हिरासत में पूछताछ जरूरी : कोर्ट
अदालत ने कहा कि मामले में आरोपों की गहन जांच आवश्यक है। आरोपी से हिरासत में पूछताछ के दौरान जमीन के सौदों, रकम के लेनदेन और अन्य लोगों के साथ किए गए समझौतों से जुड़ी अहम जानकारी सामने आ सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत आरोपी का अधिकार नहीं, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर दी जाने वाली विवेकाधीन राहत है। जांच को देखते हुए अदालत ने विक्रम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।