चंडीगढ़। विधायक और किसान विंग प्रधान कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि कोटकपूरा गोलीकांड मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी और पूर्व एसएसपी चरणजीत शर्मा की ओर से नार्को टेस्ट करवाने से पलट जाना सिद्ध करता है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से संबंधित दुर्घटनाओं के लिए तत्कालीन शिअद-भाजपा सरकार जिम्मेदार है। संगत पर गोली चलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेेदार हैं।
पार्टी मुख्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में संधवां ने कहा कि कोटकपूरा गोलीकांड का सच जानने के लिए नई बनाई जांच समिति को तत्कालीन पुलिस अधिकारी जांच पड़ताल में सहयोग नहीं कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का नार्को टेस्ट से मुकरना बादल सरकार की ओर से किए कामों पर पर्दा डालने की कोशिश है। गोलीकांड की जांच करने वाली पहली जांच समिति ने इन पूर्व पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया है, लेकिन कैप्टन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बादलों को बचा रही है। संधवां ने कहा कि इन पुलिस अधिकारियों समेत बादलों का भी नार्को टेस्ट करवाना चाहिए, जिससे श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, कोटकपूरा गोलीकांड और अन्य घटी घटनाओं का सच सामने आ सके। उन्होंने कहा अगर सरकार की ओर से बादलों का नार्को टेस्ट नहीं करवाया जाता तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी नार्को टेस्ट करवाया जाना चाहिए, जिससे कि पता चल सके कि वे मुख्यमंत्री बादलों का कैसे बचाव कर रहे हैं।
संगत पर गोली चलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री जिम्मेदार: ग्यासपुरा
शिअद नेता मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि कैप्टन सरकार श्री गुटका साहिब की कसम उठा कर सत्ता में आई थी कि सरकार बनने के बाद बेअदबी और गोलीकांड के दोषियों को जेल भेजा जाएगा, लेकिन कैप्टन सरकार ने साढ़े चार साल में कोई कार्रवाई नहीं की, न ही साजिशकर्ताओं और न ही किसी दोषी को सजा दी गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार के बीच मिलीभगत होने का दोष लगाते मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि इंसाफ मांग रही सिक्ख संगत पर पुलिस की गोली चलने के लिए सीधे तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री जिम्मेदार हैं।