चंडीगढ़। पंजाब इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है। इसके बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बिजली को लेकर साजिश कर रहे हैं। यह आरोप शिअद नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने शनिवार को लगाए। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए केजरीवाल के द्वारा ताप संयंत्रों को बंद करने वाली याचिका की शिअद निंदा करता है।
शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि हर कोई जानता है कि पंजाब में बिजली संकट है और किसानों, उद्योगों, व्यापारियों और आम आदमी को बिजली की भारी कटौती की जा रही है। इस बिजली आपातकाल के बीच केजरीवाल ने पंजाब के थर्मल प्लांट को बंद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह सब एक साजिश का हिस्सा है। यह स्पष्ट है कि आप चाहती है कि पंजाब में बिजली की स्थिति और खराब हो, ताकि वह इस मुद्दे पर राजनीति कर सकें। मजीठिया ने कहा कि अगर याचिका सफल होती तो यह व्यापार को अव्यवहारिक बनाने के अलावा राज्य के उद्योग का भी सफाया कर देती। मजीठिया ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने पंजाब विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाया, भले ही उन्होंने राज्य का दौरा करने पर पंजाब समर्थक मुखौटा लगाया था। इससे पहले सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे के मामले में केजरीवाल ने वकालत की थी कि पंजाब का दौरा करते समय नहर का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। अकाली नेता ने कहा कि केजरीवाल का दोहरा चरित्र तब भी देखा गया, जब उन्होंने राज्य के दौरे के दौरान किसानों के साथ सहानुभूति व्यक्त की और फिर तुरंत अदालत में हलफनामा दायर कर धान की पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की।
थर्मल प्लांटों पर सियासी दल कर रहे राजनीति : चीमा
वहीं पंजाब के थर्मल प्लांटों के बारे में आम आदमी पार्टी पर सियासी दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के संबंध में विपक्ष नेता हरपाल सिंह चीमा ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। अकाली दल ने गलत बिजली समझौते कर पंजाब के लोगों के हाथ काटकर निजी कंपनियों को दे दिए। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनकी मिलीभगत होने के कारण वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अकाली दल व कांग्रेस का एक ही एजेंडा है कि पंजाब के लोगों को गुमराह करके कैसे सत्ता ली जाए। इसे आप कभी पूरा नहीं होने देगी। जैसे दिल्ली में अरविंद केजरीवाल लोगों को सस्ती व 24 घंटे बिजली मुहैया करवा रहे हैं, उसी तरह पंजाब में सरकार बनने के बाद दिल्ली मॉडल को पंजाब में लागू किया जाएगा।