वोट डालने के लिए लाइन में लगी महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करने में कालका के मतदाता अव्वल रहे, जबकि पंचकूला दूसरे स्थान पर रहा। कालका विधानसभा के मतदाताओं ने लोकतंत्र के महापर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। यही कारण है कि कालका का मतदान प्रतिशत 67.10 रहा, जबकि पंचकूला विधानसभा के मतदाता 2014 के रिकॉर्ड 65.72 को भी तोड़ नहीं पाए।
पंचकूला में कुल मतदान 58.70 प्रतिशत ही हुआ। यदि बात 2019 लोकसभा चुनाव की करें तो कालका में 72.80 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि पंचकूला विधानसभा में 65.50 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। जिले का कुल मतदान प्रतिशत 69.15 था। इस बार विधानसभा चुनाव में जिले में कुल 65 प्रतिशत ही मतदान हुआ है।
2014 के मुकाबले इस बार कम हुआ पंचकूला विधानसभा में मतदान
विधानसभा चुनाव 2014 में पंचकूला विधानसभा में 65.72 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार पंचकूला विधानसभा में 58.70 प्रतिशत मतदान ही हुआ है। चुनावी विशेषज्ञों और पंचकूला वासियों का कहना है कि 7.02 प्रतिशत मतदान कम होने का नुकसान सीधे तौर पर भाजपा को हो सकता है।
पंचकूला विधानसभा सीट पर सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही दिखा। जजपा, आप, स्वराज व इनेलो के तो ज्यादातर बूथों पर पोलिंग एजेंट ही दिखाई नहीं दिए और कई जगह कुर्सियां खली मिलीं। भाजपा और कांग्रेस को छोड़ कर बाकी चार पार्टियों के तो कई जगह टेंट ही नहीं लगे थे।
शहरी मतदान प्रतिशत में गिरावट अशुभ संकेत
ग्रामीण के मुकाबले शहर के मतदान प्रतिशत में गिरावट सत्ता पक्ष के लिए अशुभ संकेत है। इस बार जिले के मतदान फीसदी पर नजर दौड़ाई जाए तो शहरी क्षेत्र में काफी कम मतदान हुआ है। ग्रामीणों ने मतदान करने में काफी रुचि दिखाई है। हालांकि परिणाम के लिए लंबा इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
ईवीएम में बंद प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 24 अक्तूबर को हो जाएगा। पंचकूला और विधानसभा सीट से कौन सिकंदर बनेगा यह जनता ने तय कर दिया है और अब महज घोषणा होनी बाकी है। इसी के साथ 24 अक्तूबर को किसके घर दिवाली मनेगी यह देखना है।