चंडीगढ़। जिला अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंचे पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की याचिका पर सुनवाई करने से न्यायमूर्ति अमोल रतन सिंह के बाद न्यायमूर्ति सुवीर सहगल ने भी इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश अब मामले की सुनवाई नई पीठ को सौंपेंगे।
सैनी ने अपनी याचिका में कहा है कि 2015 में एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी गुरमीत सिंह पिंकी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। 29 साल पुराने मामले में अब एफआईआर दर्ज की गई है, जिसका कोई औचित्य नहीं बनता है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें फंसाने का है। इस मामले में गत 11 मई को मोहाली जिला अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर में हत्या की धाराओं को भी जोड़ दिया था, जिसके चलते 1 सितंबर को ट्रायल कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अब सैनी ने उच्च न्यायालय से गुहार लगाते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की है।
यह है मामला
1991 में सैनी जब चंडीगढ़ पुलिस में एसएसपी थे तब हुए एक आतंकी हमले की जांच के दौरान पुलिस ने बलवंत मुल्तानी को उसके घर से हिरासत में लिया था। आरोप है कि सैनी के आदेश पर पुलिस ने सेक्टर 11 और सेक्टर 17 के थानों में बुरी तरह टॉर्चर किया था। 1991 में बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण के मामले में मोहाली पुलिस ने मई, 2020 में एफआईआर दर्ज की थी। मोहाली जिला अदालत ने सैनी को इस मामले में 11 मई को अग्रिम जमानत दे दी थी।