पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला अदालत द्वारा जेपी गारबेज प्लांट को बड़ा झटका देते हुए गारबेज प्लांट को टेकओवर करने संबंधी एक माह की मोहलत के आदेश को खारिज कर दिया। फैसला होने तक निगम ही इसका संचालन करेगा। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही विवाद के निपटारे के लिए रिटायर्ड जस्टिस एएल बाहरी को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है।
याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि जेपी प्लांट कचरे का निस्तारण कर सकता है तो ठीक, नहीं तो निगम इस मामले में निर्णय ले। कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो निगम को ही जुर्माना भरना पड़ेगा। उसके बाद फरवरी माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि जेपी प्लांट को निगम टेकओवर करेगा।
प्लांट के अधिकारियों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन वे फैसले के खिलाफ जिला अदालत चले गए। जहां जज ने कहा कि 90 दिनों में प्लांट के अधिकारी कहीं से स्टे ऑर्डर ले आएं या इस फैसले को बदलवा लें। लेकिन इस अवधि में जब कंपनी के अधिकारी कोई निर्णय नहीं ले सके तो अधिकारियों को 24 घंटे में प्लांट खाली करने का नोटिस भेज दिया गया।
एनजीटी ने कहा, टिपिंग फीस नहीं देगा नगर निगम
प्लांट के अधिकारी निगम से कचरा प्रोसेस करने के एवज में टिपिंग फीस मांग रहे थे, जबकि निगम फीस नहीं देना चाहता था। एनजीटी ने कहा कि टिपिंग फीस केवल 9 माह के लिए थी। अब निगम कंपनी को टिपिंग फीस नहीं देगा। नगर निगम द्वारा कब्जा लेने के बाद प्लांट के अधिकारी रोक के आदेश लेकर पहुंचे तो निगम ने साफ कहा कि अब इसका क्या औचित्य है।
इसके बाद जेपी ने दोबारा जिला अदालत की शरण लेते हुए राहत की मांग की। इस पर जिला अदालत ने यूटी प्रशासन से जवाब मांग लिया है। इसी बीच प्रशासन और नगर निगम जिला अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए जिस पर वीरवार को सुनवाई हुई।
आर्बिट्रेटर के समक्ष प्लांट संचालन के लिए अर्जी दे सकता है जेपी
सुनवाई के दौरान प्रशासन और निगम की ओर से कहा गया कि जिला अदालत ने जेपी को राहत देने के आदेश जारी करने से पूर्व न तो प्रशासन से लिखित में जवाब लिया और न ही उसे औपचारिक नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले का निपटारा करने के लिए जस्टिस एएल बाहरी को आर्बिट्रेटर नियुक्त करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक विवाद का निपटारा नहीं हो जाता तब तक नगर निगम ही प्लांट के संचालन का काम देखेगा। हालांकि हाईकोर्ट ने जेपी को छूट दी कि वह आर्बिट्रेटर के सम्मुख प्लांट के संचालन के लिए अर्जी दाखिल कर सकते हैं, जिस पर आर्बिट्रेटर निर्णय लेगा।