अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि विधायक सुखपाल सिंह खैरा के पूर्व सुरक्षा अधिकारी जोगा सिंह की गिरफ्तारी 2015 के गुरदेव सिंह देबी ड्रग रैकेट के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अब अन्य आरोपियों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। चीमा शनिवार को प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे है।
चीमा ने आरोप लगाया कि इस मामले में देरी आरोपियों के शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस नेतृत्व से राजनीतिक संबंधों के कारण हुई है। चीमा ने कहा कि 28 सितंबर 2023 में नाम सामने आने के बाद से ही जोगा सिंह फरार था। अक्टूबर 2023 में फाजिल्का की सेशन अदालत और जनवरी 2024 में हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
नवंबर 2023 में विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के चलते ऑस्ट्रेलिया भागने की कोशिश करते समय जोगा को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। उसे ट्रांजिट पर लाया गया और जलालाबाद की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन का पुलिस रिमांड मिला है।
चीमा ने आरोप लगाया कि जोगा सिंह ने सुखपाल सिंह खैरा और इस मामले में आरोपी गुरदेव सिंह और उसकी यूके स्थित बहन चरनजीत कौर के बीच बातचीत में मुख्य भूमिका निभाई। जोगा सिंह ने इन कॉलों के प्रबंध के लिए अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल विश्लेषण से कई मामले सामने आए हैं।
आम आदमी पार्टी मुझे बदनाम करने की रच रही साजिश : खैरा
विधायक सुखपाल खैरा ने कहा कि आम आदमी पार्टी मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। मेरी हलके के एक व्यक्ति का ड्रग्स केस में नाम आया जिसने मुझे कॉल करना शुरू कर दिया। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मेरे खिलाफ कार्यवाही पर स्टे लगाया हुआ है। जोगा सिंह का भी संबंधित मामले में कोई रोल नहीं है। आप पूरे मामले को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रही है।