चंडीगढ़। वाहन दुर्घटना में मृत्यु के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से किसान व डेयरी संचालक की आय को अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के बराबर मानकर मुआवजा तय करने को गलत करार दिया है। कोर्ट ने एमएसीटी लुधियाना द्वारा तय 13 लाख 90 हजार रुपये के मुआवजे को करीब 9 लाख रुपये बढ़ाते हुए 22,84,700 रुपये कर दिया है।
लुधियाना निवासी गुरजिंदर सिंह की 21 अक्तूबर 2017 को मोटर वाहन हादसे में मौत हो गई थी। उनके आश्रित रामजी दास व अन्य ने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल लुधियाना में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया था कि गुरजिंदर किसान था और साथ ही डेयरी संचालन का काम भी करते हुए प्रतिमाह 50 हजार रुपये कमाता था।
एमएसीटी ने आय से जुड़े दस्तावेजों के अभाव में मृतक की आय अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के बराबर मानते हुए 13 लाख 90 हजार रुपये तय की थी। इस राशि को अपर्याप्त मानते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह आम जानकारी की बात है कि खेती और उससे जुड़ी गतिविधियां जिसमें छोटे पैमाने पर डेयरी फार्मिंग भी शामिल है, ज्यादातर असंगठित क्षेत्र में होती हैं, जहां दस्तावेजी रिकॉर्ड बहुत कम मामलों में रखा जाता है।
इस वजह से भरोसेमंद मौखिक सबूतों को छोड़कर, सिर्फ दस्तावेजी सबूत पर जोर देना गलत है। कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा एक कल्याणकारी कानून है और ऐसे में इन मामलों में कोर्ट को दस्तावेजी सबूतों के अभाव में न्यूनतम मुआवजा तय नहीं करना चाहिए।
परिस्थितियोंं व कार्य की प्रकृति सहित अन्य पहलुओंं पर विचार करते हुए न्यायोचित मुआवजा पीड़ित पक्ष को दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने मृतक की आय 9 हजार रुपये प्रतिमाह मानने के आदेश को रद्द करते हुए इसे 15 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया। इसके साथ ही मुआवजा राशि को 13 लाख 90 हजार से बढ़ाकर 22,84,700 रुपये कर दिया।