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जानलेवा हादसों पर रोक लगानी है तो इंटरसेक्शन भी करने होंगे बंद

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जानलेवा हो सकने वाले इंटरसेक्शन। सेक्टर 16 से 15 की डिवाइडिंग रोड के बीच से गुजरते वाहन - फोटो : PKL OFFICE
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शहर के ट्रैफिक प्लान को दुरुस्त करना है तो जिला पुलिस प्रशासन को मुख्य मार्गों पर बने अनावश्यक इंटरसेक्शन भी बंद करने होंगे। भले ही जिला प्रशासन मौजूदा समय में पंचकूला का ट्रैफिक वॉल्यूम कम होने का हवाला देता हो। लेकिन मुख्य मार्गों पर सरपट दौड़ रहे हर वाहन चालक की सुरक्षा आवश्यक है। शहर के लगभग सभी मुख्य मार्गों पर एक नहीं, बल्कि कई खतरनाक इंटर सेक्शन मौजूद हैं। नतीजतन, सीधे रोड पर एक समान रफ्तार में ड्राइविंग करने वाले वाहन चालकों को इंटर सेक्शन से मुख्य मार्ग पर प्रवेश करने वाले वाहन चालकों व आमजन के अचानक सामने आने के कारण तेजी से ब्रेक लगाना पड़ता है। इन इंटर सेक्शन पर हर पल जानलेवा हादसे होने का खतरा बना है। लेकिन जिले की सड़क सुरक्षा की दिशा में इस खामी को दूर करने के लिए फिलहाल पुलिस-प्रशासन की तरफ से कोई प्रयास नहीं किया गया है। जिला पंचकूला के सड़क मार्गों पर किन बदलावों को करना अति आवश्यक है, इसका निर्णय डीसी समेत अन्य उच्चाधिकारी, रोड सेफ्टी एसोसिएट की रिपोर्ट के बाद ही करते हैं।
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चंडीगढ़ में बंद करने पड़े थे इंटर सेक्शन
सड़क हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन काफी समय पहले ही मुख्य मार्गों पर बने इंटर सेक्शन बंद कर चुका है। साथ ही जिन अंदरूनी सेक्टरों के मुख्य मार्ग पर आने के लिए इंटर सेक्शन को हर समय बंद रखना मुश्किल था, वहां भी यूटी प्रशासन ने स्टडी कर सुबह व शाम के पीक ऑवर्स में इंटर सेक्शन को दो-दो घंटे बंद किया है। हालांकि, चंडीगढ़ का ट्रैफिक वॉल्यूम पंचकूला के मुकाबले कई गुणा अधिक है। लेकिन पंचकूला के मुख्य मार्गों पर बने अनावश्यक इंटर सेक्शन का लोगों को फायदा नहीं, बल्कि जान खतरे में पड़ने का डर अधिक है।
एक किमी. पर तीन इंटर सेक्शन
ऐसा नहीं है कि पंचकूला शहर में कई किमी. के बाद कोई इंटर सेक्शन आता हो, बल्कि पंचकूला में एक किमी. के बीच दो से तीन इंटर सेक्शन मौजूद हैं। जबकि इससे अलग लाइट प्वाइंट भी है, जिससे होकर लोग अंदरूनी सेक्टरों से मुख्य मार्ग पर पहुंचते हैं। यहीं से सीधी आवाजाही करने वाले वाहन चालक भी गुजरते हैं।
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नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर है फोकस
फिलहाल प्रशासन का फोकस नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर वर्षों से मौजूद उन खामियों को दूर करने पर है, जिनके कारण जानलेवा हादसे होते रहे हैं। नेशनल हाईवे-105, पिंजौर-बद्दी हाईवे, एसएच-01 और पिंजौर-कालका रोड, एनएच-7 पर जिला प्रशासन हर उस खामी को दूर करने के प्रयास में है, जिसके चलते आमजन की जान अधिक संख्य में गई है। हादसों के कारणों की स्टडी कर रिपोर्ट देने का जिम्मा रोड सेफ्टी एसोसिएट सिमरनजीत सिंह को सौंपा गया है। वह दिन-रात के समय फिजिकल तौर पर हादसों के कारणों की स्टेट्स रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।
जिले के ब्लैक स्पॉर्ट आइडेंटीफाई किए गए हैं। ट्रैफिक वॉल्यूम और सभी ब्लैक स्पॉट को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के हिसाब से काम जारी है। अनावश्यक इंटरसेक्शन बंद करने की जरूरत महसूस होने पर उनमें भी बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, उससे पहले जो अन्य प्राथमिकताएं हैं, उसपर काम किया जा रहा है।
- सिरनजीत सिंह, रोड सेफ्टी एसोसिएट।

जानलेवा हो सकने वाले इंटरसेक्शन। इंडस्ट्रियल एरिया फेस 2 से 15 की डिवाइडिंग रोड के बीच से गुजरते वा- फोटो : PKL OFFICE

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