चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज और पनबस में कार्यरत कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का लाभ देने से इन्कार करने के पंजाब सरकार के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान कार्य कर रहे हैं तो उन्हें केवल अनुबंध या अन्य श्रेणी का कर्मचारी बताकर कम वेतन देना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
मुकेश कुमार और अन्य कर्मचारियों ने 2 जुलाई 2019 और 13 सितंबर 2024 को जारी आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से पंजाब रोडवेज और पनबस में कार्यरत हैं और नियमित कर्मचारियों की तरह ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है और वेतनमान व अन्य सुविधाओं में भी भेदभाव किया जा रहा है।
याची पक्ष ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। यदि दो कर्मचारियों से एक जैसा कार्य लिया जा रहा है तो वेतन में भेदभाव करना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। पंजाब सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता अलग श्रेणी के कर्मचारी हैं और उनकी नियुक्ति की शर्तें अलग हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि केवल नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब कार्य और जिम्मेदारियां समान हों।