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औद्योगिक क्षेत्र : डेढ़ करोड़ से बनीं सड़कें पहली ही बारिश में हुई जर्जर

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लोग बोले-औद्योगिक क्षेत्र में लुक की सड़कें नहीं कारगर, भारी वाहनों से जल्दी हो जाते हैं खराब
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 की डेढ़ करोड़ की सड़कें बरसाती पानी में महज सात से आठ माह में बह गई है। इनमें अभयपुर पुरानी मंदिर के साथ वाली और प्लॉट नंबर-102 के सामने वाली सहित कई सड़कें शामिल हैं। यहां सड़कें कम कीचड़ ज्यादा दिखता है। किसी गांव के बीच से गुजरती सड़क से भी हालात ज्यादा बदतर हैं। यहां करोड़ों रुपये के इंडस्ट्रियल प्लाट के बीच कीचड़ से भरी सड़क एरिया के विकास पर सवालिया निशान लगा रही है। कीचड़ के इस तालाब को देखकर नहीं लगता है कि यहां कोई सड़क भी है। जर्जर सड़कों के कारण इस कदर लोग परेशान हैं कि यहां से गुजरने से बचते हैं। नगर निगम की उपेक्षा के कारण फेज-1 में काम करने वाले कामगारों का कहना है कि दिन में एक बार इस क्षेत्र से गुजर जाओ तो कपड़े बदलना जरूरी हो जाता है। परेशान लोगों ने कुछ जगह टूटी सड़कों को मलबा और मिट्टी से पाटकर समतल करने का प्रयास किया है, लेकिन बरसाती पानी से पूरी सड़क नदी में तब्दील हो जाती है। वर्तमान में करीब 20 से 25 सड़कें बदहाल पड़ी हैं।


सात से आठ माह में दम तोड़ गईं सड़कें
वार्ड के पार्षद राजेश निषाद ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 अभयपुर पुरानी मंदिर के साथ वाली सड़क और प्लॉट नंबर-102 के सामने वाली सड़क सहित इस क्षेत्र की कई मार्ग पर लुक वाली सड़कों का निर्माण नगर निगम ने करवाया था। साथ से आठ माह भी सड़कें नहीं टिक पाई। यहां आरसीसी की सड़कें ही कारगर हैं, क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र में भारी वाहनों का आवागमन ज्यादा होता है। यहां लुक की सड़कें कारगर नहीं हैं। इसके अलावा प्लॉट नंबर-9 के पास आधी सड़क छोड़ दी गई है। इस मसले को नगर निगम के हाउस की बैठक में भी उठाया था, लेकिन नतीजा आज भी जीरो है।
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औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में बिना प्लानिंग के काम हो रहा है। एक तो सड़कों की रिकार्पेटिंग नहीं हो रही है। जिन सड़कों की रिकार्पेटिंग कर रहे हैं, उसकी भी कोई प्लानिंग नहीं है। प्लॉट नंबर-239 के सामने कंक्रीट की सड़कें बना रहे हैं। सड़कों का लेबल इतना ऊंचा कर दिया है, कि फैक्टरी के अंदर बारिश में छह-छह फुट पानी भर गया था। - सीबी गोयल, पूर्व पार्षद और उद्यमी पंचकूला


औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 की तीन सड़कों का टेंडर हुआ था। इसमें दो सड़कों का काम पूरा कर लिया गया है। जो सड़कें रिकार्पेटिंग के बाद टूट गई हैं, उन सड़कों की बारिश के बाद मरम्मत होगी। - अजय, एसडीओ, नगर निगम पंचकूला
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70 करोड़ का राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र में करीब 900 फैक्टरियों में 23000 मजदूर और अन्य लोग काम करते हैं। इतने दिनों में सरकार सड़कें नहीं बनवा पाई। जो बनवाई थी वह भी चंद माह में उखड़ गईं। नगर निगम के लापरवाह कार्य प्रणाली के चलते उद्यमियों का व्यापार भी प्रभावित होने लगा है। हर फैक्टरी के आगे सड़कों के गड्ढे अब खाई में तब्दील होने लगे हैं। - मनीष बंसल, उद्यमी और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पंचकूला
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