नया राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास कोष उच्च जोखिम, उच्च प्रभाव वाले गहन तकनीकी नवाचार के लिए अवसर देगा :सिंह
- भारत अब प्रौद्योगिकी आधारित विकास में वैश्विक रुझानों को आकार दे रहा
- पारंपरिक अर्थव्यवस्था से एक नवाचार अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ
माई सिटी रिपोर्टर
नया राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास कोष: उच्च जोखिम, उच्च प्रभाव वाले नवाचारों के लिए अवसर
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चार दिवसीय भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में कहा कि भारत पारंपरिक अर्थव्यवस्था से नवाचार-संचालित राष्ट्र बनने की निर्णायक दिशा में है। अब देश केवल वैश्विक तकनीकी रुझानों का पालन नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें आकार दे रहा है। सेक्टर-5 स्थित शॉलीमार ग्राउंड में चल रहे 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में दूसरे दिन भी केंद्रीय मंत्री ने उपस्थिति दर्ज की।
डॉ. सिंह ने फायरसाइड चैट के दौरान बताया कि पिछले दशक में भारत की वैज्ञानिक सोच, नीतिगत दिशा और शासन दृष्टिकोण में मौलिक बदलाव आया है। देश का आर्थिक विकास अब विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार से संचालित है और वैश्विक समुदाय भारत को नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित विकास का मॉडल मानता है।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है, बदलाव का मूल कारण राजनीतिक समर्थन की गुणवत्ता और राष्ट्रीय उद्देश्य की स्पष्टता है। भारत अब जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु नवाचार, पुनर्योजी विज्ञान और अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास कोष
डॉ. सिंह ने नए राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास कोष की शुरुआत की जानकारी देते हुए कहा कि यह उच्च-जोखिम, उच्च-प्रभाव वाले नवाचारों को बढ़ावा देगा। यह पहल उन क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करेगी जो पहले निजी क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण थे, जैसे अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा। कोष का उद्देश्य कम ब्याज दर पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता के माध्यम से भारतीय उद्योग को मजबूत और स्वतंत्र तकनीकी योगदानकर्ता बनाना है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसर
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। मुट्ठी भर कंपनियों से लगभग 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप तक। भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां केवल रॉकेट प्रक्षेपण तक सीमित नहीं हैं बल्कि कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल समाधान और आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का वैश्विक मॉडल तैयार किया गया है।
वैश्विक स्तर पर भारत का बढ़ता कद
डॉ. सिंह ने बताया कि आज युवा भारतीयों को विदेशों में अधिक सम्मान प्राप्त है और उनकी पेशेवर विश्वसनीयता बढ़ गई है। हाल के महीनों में कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की शिकायत निवारण प्रणाली, वरिष्ठ नागरिकों के डिजिटल प्रमाणन तंत्र और अन्य सार्वजनिक सेवा नवाचारों को समझने के लिए दौरा किया जो दर्शाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक सर्वोत्तम प्रथाओं का निर्माता बन चुका है।