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आगाज : कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत होगा शहर के शौचालयों का होगा कायाकल्प, सुलभ एजेंसी की तरफ से शहर के 35 शौचालयों की उचित देखरेख नहीं करने के बाद लिया फैसला

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पंचकूला। नगर निगम पंचकूला द्वारा शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों का कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत कायाकल्प करवाया जाएगा। सुलभ एजेंसी की तरफ से शौचालयों की देखरेख का काम सही तरीके से नहीं किया गया है। शहर की मार्केट एवं अन्य जगहों पर करीब 35 शौचालय हैं, जिन्हें सीएसआर के तहत नए डिजाइन और सुविधाओं के हिसाब से तैयार करवाया जाएगा। चंडीगढ़ की तर्ज पर यह काम अलॉट किया जाना है।
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नगर निगम पंचकूला द्वारा सीएसआर कंपोनेंट्स के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर जन एवं सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव एवं सौंदर्यीकरण के बारे में 31 अगस्त 2021 तक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इसमें इच्छुक मार्केट एसोसिएशन, फर्म, समितियां, बैंक भी आवेदन कर सकते हैं। पंचकूला के मेयर कुलभूषण गोयल ने बताया कि सभी जन एवं सामुदायिक शौचालयों का पुनर्निर्माण सीएसआर के तहत करवाया जाना है। कई संस्थाएं यह काम करने के लिए तैयार हैं। इसमें नगर निगम द्वारा कोई पैसा खर्च नहीं किया जाएगा, बल्कि सीएसआर के तहत काम करवाया जाएगा। विज्ञापन अधिकार में 75 प्रतिशत शौचालयों का पुनर्निर्माण करने वाली संस्था और 25 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम का रहेगा।
कुलभूषण गोयल ने बताया कि करीब 100 नए सार्वजनिक शौचालय खरीदने का आदेश भी दिया गया है। इसमें एक सीट, दो सीट और पांच सीट वाले शौचालय होंगे। जोकि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे, ताकि राहगीरों को खुले में शौच ना जाना पड़े। शहर की मार्केट एवं कुछ सार्वजनिक स्थानों पर नगर निगम द्वारा शौचालयों के रखरखाव का काम सुलभ एजेंसी को दिया गया था, लेकिन काफी समय से शौचालयों में सुविधाएं ना देने की शिकायतें आ रही थी। कई मार्केट एसोसिएशन मेयर और निगम अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुकी थी। सुलभ एजेंसी को निगम द्वारा हर महीने लाखों रुपये वहन किए जाते थे, लेकिन काम कोई नहीं हो रहा था। अब सीएसआर के तहत प्राइवेट लोगों को शौचालयों का रखरखाव सौंप दिया जाएगा और नगर निगम को कोई पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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सुलभ एजेंसी द्वारा अपने कर्मचारियों को भी वेतन नहीं दिया गया है। शौचालयों पर काम करने वालों का कहना है कि सुलभ कंपनी उन्हें पैसा नहीं दे रही है और कह देती है कि निगम से पैसा नहीं मिला। सुलभ एजेंसी द्वारा अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्त का वेतन ना मिलने के कारण उनका जीना दुर्भर हो गया है। ज्यादातर सुलभ शौचालयों की हालात अभी तक बदतर है। शहर के किसी सुलभ शौचालय में बिजली, तो किसी में पानी की किल्लत है। टॉयलेट में लगे बिजली के बोर्ड खराब हैं। टॉयलेट में गंदगी फैली है। इसके चलते शौचालय का इस्तेमाल करने से लोग कतरा रहे हैं।
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