फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा में वन भूमि पर गैर वन्य कार्य पर जारी रहेगी रोक, हरियाणा सरकार से जवाब तलब

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब भूमि परिसंरक्षण अधिनियम 1900 (पीएलपीए) में संशोधन के बिल को संशोधित करने को चुनौती देने वाली याचिका पर हरियाणा सरकार के जवाब से असंतोष जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा को नए सिरे से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने वन भूमि पर किसी भी गैर वन्य कार्य को रोकना सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार को दिए गए आदेश जो जारी रखने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन

पीएलपीए के अधीन क्षेत्रों में कोई निर्माण कार्य व अवैध खनन को रोकने के लिए शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील की है। याची ने बताया कि उसने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। इसमें बताया गया कि वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व विधानसभा स्पीकर ने 20 अगस्त, 2019 को बताया था कि संशोधन बिल पर राज्यपाल की सहमति आना बाकी है, जबकि राज्यपाल ने रिकॉर्ड के अनुसार 11 जून, 2019 को इस बिल को सहमति दे दी गई है।
बंसल ने कहा कि पीएलपीए में संशोधन वन व वन्य प्राणियों की सुरक्षा तथा जनहित के विरुद्ध है। हरियाणा सरकार ने 2006 में वन नीति बनाई थी। इसके अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र 6 प्रतिशत है जिसे 2010 में 10 प्रतिशत तथा 2020 में 20 प्रतिशत किया जाना तय था, लेकिन अब हरियाणा में केवल 3.5 प्रतिशत वन ही बचा है। यदि पीएलपीए में संशोधन पूरी तरह से लागू हो जाता है तो वन क्षेत्र केवल 2 प्रतिशत रह जाएगा।
विज्ञापन

पीएलपीए हरियाणा के 10 जिलों में मौजूद शिवालिक व अरावली पहाड़ियों पर लागू है, जहां नॉन फॉरेस्ट एक्टिविटी पर प्रतिबंध है। बिल पास होने से वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग, पेड़ों की कटाई, भूमिगत जल स्तर गिरना, इमारतों का निर्माण होने से पर्यावरण प्रभावित होगा। सरकार इससे भू-माफिया व बिल्डर्स को फायदा पहुंचाना चाहती है। बंसल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि जो भूमि वन विभाग के पंजाब भू-परिसंरक्षण अधिनियम 1900 (पीएलपीए) के अधीन आरक्षित है वन विभाग उस अधिसूचना को रद्द नहीं कर सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें