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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला: अब मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में CBI, डिजिटल फुटप्रिंट्स का लेगी सहारा

Sat, 18 Apr 2026 08:21 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला

सार

घोटाले की शुरुआत हरियाणा स्टेट विजिलेंस की कार्रवाई से हुई थी। फरवरी के अंतिम सप्ताह में विजिलेंस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और करीब डेढ़ महीने चली एसआईटी जांच में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी।
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आईडीएफसी बैंक - फोटो : फाइल
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विस्तार
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हरियाणा के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अब अपना रुख इस साजिश के असली खिलाड़ियों की ओर मोड़ दिया है। एजेंसी का मानना है कि अब तक गिरफ्तार आरोपी इस बड़े नेटवर्क के सिर्फ मोहरे हो सकते हैं।

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सीबीआई के एडिशनल एसपी पुष्पपाल पॉल ने बताया कि आरोपियों के न्यायिक हिरासत में जाने के बाद कई नए तथ्य सामने आए हैं। सबसे अहम खुलासा यह है कि घोटाले की रकम नकद निकाली गई, जिसे विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाया गया। आशंका है कि इन्हीं में मास्टरमाइंड शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि आरोपियों के न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो और सीबीआई की टीमों ने डिजिटल फुटप्रिंट्स और कागजी साक्ष्य जुटाए हैं।

जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु

बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर और सरकारी धन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

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आईडीएफसी फर्स्ट और एयू बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खोलने की साजिश का खुलासा।

सीबीआई ने हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की 23 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 4 को आधार बनाकर अपनी एफआईआर (RC2212026E0005) दर्ज की है।

 

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सीबीआई ने छह आरोपियों को 2 दिन के रिमांड पर लिया

आईडीएफसी से जुड़े 590 करोड़ रुपये के गबन मामले में सीबीआई की जांच तेज हो गई है। दिल्ली सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को रिभव ऋषि समेत छह आरोपियों को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें दो दिन के रिमांड पर भेज दिया गया।

सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि घोटाले के पीछे शामिल अन्य मास्टरमाइंड तक पहुंचने और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ जरूरी है। शुक्रवार शाम सभी आरोपियों का सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में मेडिकल भी करवाया गया।

रिमांड पर लिए गए आरोपियों में अभय कुमार (मोहाली), रिभव ऋषि (पंचकूला), स्वाति (अभय की पत्नी), अभिषेक सिंगला (अभय का बहनोई), नरेश कुमार और मनीष जिंदल (दोनों मोहाली निवासी) शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि आरोपी नए बैंक खाते खोलकर उनमें पैसे ट्रांसफर करते थे और बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। गबन की रकम को पहले शेल कंपनियों में भेजा जाता था, फिर लेयरिंग के जरिए कई खातों में घुमाकर अंत में नकद निकासी की जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग लोगों में बांट दिया जाता था, जिससे लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
सीबीआई अब आरोपियों का आमना-सामना कराकर पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।

गौरतलब है कि इस घोटाले की शुरुआत हरियाणा स्टेट विजिलेंस की कार्रवाई से हुई थी। फरवरी के अंतिम सप्ताह में विजिलेंस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और करीब डेढ़ महीने चली एसआईटी जांच में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी।

सीबीआई ने 8 अप्रैल 2026 को दिल्ली में केस दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली और महज नौ दिनों में कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को प्रोडक्शन रिमांड पर लिया।
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