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हाईकोर्ट की टिप्पणी- इंसान फोटोग्राफिक मेमोरी मशीन नहीं, जो हर बात को सटीक याद रख सके

Wed, 15 Jul 2020 12:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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 यौन शोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि इंसान इंसान होता है, उससे फोटोग्राफिक मेमोरी मशीन जैसी उम्मीद नहीं की जा सकती । जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने अपनी ही बेटी का यौन उत्पीडऩ कराने के आरोप में दोषी ठहराई गई महिला सहित दो दोषियों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की है।
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इस मामले में अपने पति से अलग रह रही महिला का बहन के पति के साथ अवैध संबंध था। महिला के बहनोई ने उसकी बेटी का यौन शोषण करने की भी कोशिश की थी। महिला ने बेटी का साथ देने के बजाय अपने बहनोई का पक्ष लिया। जब-जब उसकी बेटी से छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई तब-तब महिला ने इसे नजरअंदाज किया और अपनी ही बेटी की पिटाई कर दी।

लड़की ने नवंबर 2014 में चंडीगढ़ पुलिस की ओपन विंडो में शिकायत की थी, जिसके बाद लड़की की मां और मौसा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस शिकायत के बाद महिला और उसके बहनोई दोनों को जिला अदालत चंडीगढ़ द्वारा दोषी ठहराया गया था। इस सजा के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा को चुनौती दी।
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उनके अनुसार शिकायताकर्ता बार बार समय व तारीख बदल रही है । हाईकोर्ट ने यह भी साफ कहा कि जब किसी मामले में कोई एफआईआर दर्ज होती है तो बाद में शिकायतकर्ता को कोई बात याद आती है तो वह इसे शामिल करवा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता या गवाह से फोटोग्राफिक मेमोरी की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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