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मानव तन सबसे दुर्लभ, इससे उत्तम काम ही करें : आचार्य कमलेश्वर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचूकला। मानव योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है और मानव तन को सबसे दुर्लभ। इसलिए लाेगाें काे अपने जीवन में उत्तम काम ही करने चाहिए। यह कहना है कथा व्यास आचार्य कमलेश्वर द्विवेदी का। सेक्टर-5 शालीमार ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वह प्रवचन कर रहे हैं।
आचार्य कमलेश्वर ने कहा कि संतों की ओर से दिया जाने वाला ज्ञान अगर मनुष्य अपने जीवन में नहीं उतारता तब वह अंधकार की ओर चला जाता है। यही कारण है कि संताें का दिया ज्ञान लाेगाें काे सुनने के साथ उन्हें अपने जीवन में भी उतारना चाहिए। सेक्टर-5 शालीमार ग्राउंड में 18 दिसंबर तक 100वां 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जगतगुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम महाराज की ओर से 108 महायज्ञ करने के संकल्प काे पूरा किया जा रहा है। इस कड़ी में पंचकूला के अंदर 100वां महायज्ञ किया जा रहा है। सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक 108 कुंडीय यज्ञ चल रहा है। इसके बाद दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी किया जा रहा है।
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शाम सात बजे भव्य आरती में पहुंच रहे श्रद्धालु
सुबह 108 कुंडीय हवन यज्ञ के बाद दाेपहर काे श्रीमद्भागवत कथा भी चल रही है। इसके बाद शाम सात बजे से रात नौ बजे तक भव्य आरती का भी आयोजन चल रहा है। इस दौरान शहर के लाेगाें से भी पूजा पाठ करवाया जा रहा है। इसके बाद स्वयं यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम महाराज इस आरती को कर रहे हैं। इसमें काफी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु महा आरती में हिस्सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
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