पंचकूला। शहर को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोगों ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी अनिल दून के बयान पर कड़ा संज्ञान लिया है। राजीव-इंदिरा कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन के 20 से अधिक सदस्यों के शिष्टमंडल ने शुक्रवार को पार्षद ऊषा रानी के नेतृत्व में विभाग के मुख्य प्रशासक को ज्ञापन सौंपा और सात दिन के अंदर ईओ से स्पष्टीकरण देने की मांग की है। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
अवैध कॉलोनी शब्द से पहुंची है ठेस
राजीव-इंदिरा कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव डॉक्टर रामप्रसाद ने कहा कि संपदा अधिकारी ने दोनों कॉलोनियों को अवैध करार दिया है। उनके इस बयान से कॉलोनी के सैकड़ों लोगों को ठेक पहुंची है। कॉलोनी के लोगों ने संपदा अधिकारी के इस बयान को निंदनीय बताया है। ज्ञापन सौंपने वाले शिष्टमंडल में प्रदीप शर्मा, राम सरन, राजीव कुमार भुक्कल, मोहनलाल, संदीप कुमार, रामदीन यादव, मोहम्मद नासीर, राम प्रताप यादव, विजय मास्टर, मूलचंद शर्मा, उमेद सिंह, इंद्र देव, पन्ना लाल, नरेंद्र चावरिया, संदीप बेदी, पारस नाथ मौर्य, सुनील सरोहा, अरविंद शामिल थे।
भजन लाल सरकार में बनी थी पुनर्वास योजना
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक को कॉलोनी के लोगों ने बताया कि चौधरी भजन लाल की सरकार में विभाग ने पुनर्वास योजना बनाई थी, जोकि न्याय संगत थी। योजना के तहत कॉलोनी के पात्र लोगों को एक-एक मरले का प्लाट मिलना था। प्लाट की कीमत 10 हजार रुपये निर्धारित की गई थी।
आवेदन पत्र के साथ एक से लेकर ढाई हजार रुपये तक जमा करवाना था। योजना के तहत स्थानीय लोगों ने 3321500 रुपये सेक्टर-6 स्थित इंडियन बैंक में संपदा अधिकारी के खाते में जमा करवाए थे। सन 1996 में 307 परिवारों को अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया गया। 1996 से लेकर आजतक कॉलोनी के एक भी व्यक्ति को कब्जा नहीं दिया गया। इस स्थान पर प्लाट दिया जाना था वह जगह आज भी खाली पड़ी है।
फ्लैट देने के नाम पर किया गुमराह
सन 2010 में फ्लैट देने के नाम पर दोनों कॉलोनी के लोगों को विभाग ने गुमराह कर 608 लोगों से 7675500 रुपये जमा करवाए थे। इसके बाद भी कॉलोनी को अवैध बताया जा रहा है। कॉलोनी में बिजली के मीटर, राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, राशन डिपो के लाइसेंस, केमिस्ट के लाइसेंस, आंगनबाड़ी केंद्र, शराब ठेके का लाइसेंस लिया गया है।
इसके अलावा जीएसटी नंबर, पैन कार्ड, आईटीआर, इनकम टैक्स तक भरा जाता है। यहां के लोग सरकारी नौकरी भी करते हैं। वह नगर निगम को टैक्स भी अदा करते हैं। विभाग में कॉलोनी के लोगों ने 1,10 करोड़ रुपये तक जमा करवा रखे हैं। इसके बाद भी वह अवैध कैसे हैं बताया जाए।