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निजी नियोक्ता से ज्यादा कठोर कैसे हो सकता है राज्य

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चंडीगढ़। पंजाब स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के डिप्टी प्रोजेक्ट ऑफिसरों को पांचवें वेतन आयोग का लाभ न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कॉरपोरेशन और पंजाब सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य एक निजी नियोक्ता से भी कठोर कैसे हो सकता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 प्रतिशत ब्याज के साथ पांचवें वेतन आयोग का लाभ जारी करने के पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं।
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याचिका दाखिल करते हुए बलजीत सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें पदोन्नति व सीधी नियुक्ति से पंजाब स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में डिप्टी प्रोजेक्ट ऑफिसर नियुक्त किया गया था। इसके लिए बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ने 5 पद सृजित किए थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने पांचवें वेतन आयोग को अपनाया और अपने सभी कर्मचारियों को इसका लाभ दिया लेकिन याचिकाकर्ताओं को वंचित रखा। इसके साथ ही एशोर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन स्कीम के लाभ से भी याचिकाकर्ताओं को वंचित रखा गया।
इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि अभी वित्त विभाग से इन पदों को मंजूरी नहीं मिली है और ऐसे में याचिकाकर्ताओं को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यह देरी पंजाब सरकार और कॉरपोरेशन की गलती से हुई है जिसके चलते याचिकाकर्ताओं को भुगतने नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि कोई राज्य निजी नियोक्ता से ज्यादा कठोर कैसे हो सकता है। एक निजी नियोक्ता लाभ का हवाला देते हुए अपने कार्यों को सही ठहरा सकता है, लेकिन राज्य के पास यह बहाना नहीं है। राज्य को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि कर्मचारी प्रेरित रहें और अपनी क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। हाईकोर्ट ने अब राज्य के बाकी कर्मचारियों को जबसे पांचवें वेतन आयोग का लाभ मिला है तभी से याचिकाकर्ताओं को यह लाभ देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही इस राशि को 10 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के भी पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं।
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