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Panchkula News: मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल में दस दिन से आयुष्मान कार्ड पर दस दिन से नहीं हुआ कूल्हे का ऑपरेशन

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पंचकूला। शहर में मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल का यह हाल है कि लोगों को आयुष्मान कार्ड पर इलाज करवाने के लिए आए दिन भटकना पड़ रहा है। यहां पर नारायणगढ़ से आई एक महिला कमला देवी ने बताया कि उनका जमीन पर गिरने से कूल्हा टूट गया था। कूल्हा टूट जाने के बाद 16 अगस्त को वह इलाज करवाने के लिए यहां अस्पताल में आईं। इलाज कराने के दौरान 26 अगस्त को वह फिर साकेत अस्पताल में पहुंची तो डाॅक्टर ने उसको दो घंटे के बाद देखा। इसके बाद यहां के आयुष्मान कार्ड के काउंटर पर पहुंची तो सीट पर कर्मचारी गायब होने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया जा सका। वहीं, उन्हें एमआरआई, सीटी स्कैन सहित अन्य जांच के लिए छह हजार रुपये खर्च करने पड़े हैं। साकेत अस्पताल में उनका कोई टेस्ट नहीं होने से उन्हें परेशानी हो रही है। वहीं, समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण वह परेशान हैं।
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भले ही मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल में हड्डी के इलाज की सुविधाओं के दावे किए जा रहे होंं, लेकिन इलाज के लिए मरीज और तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है। उन्हें अधिकतर टेस्ट बाहर से करवाने में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही दवाएं भी पूरी नहीं मिल पाती है। इस कारण पंचकूला सहित पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से आए मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का निदान नहीं होने के कारण मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। वहीं, यहां पर आयुष्मान काउंटर से तुरंत इलाज के दावे किए जाते हैं लेकिन काउंटर से कर्मचारी गायब होने के बाद लोगों को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
यहां पर रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें हाथ फ्रैक्चर, पैर फ्रैक्चर सहित कूल्हे के ऑपरेशन किए जाते हैं। यह ऑपरेशन अस्पताल के आयुष्मान काउंटर पर आयुष्मान कार्ड लेकर आने वालों को मुफ्त सुविधा दी जाती है। लेकिन काउंटर पर कर्मचारी नहीं होने से मरीज परेशान रहे। वहीं, डेराबस्सी से आए प्रताप सिंह ने बताया कि इलाज के लिए दो घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। एक्सरे की लंबी लाइन में लगने के बाद एक्स-रे हो पाया है। वहीं, सीटी स्कैन सहित सभी टेस्ट बाहर हो रहे हैं। मदर टेरेसा आर्थोपेडिक अस्पताल राज्यपाल की देखरेख में संचालित होता है। इस कारण यहां पर पूरा बजट नहीं मिल पाता है। इस कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। यहां पर टेस्ट की सुविधा नहीं होने के कारण आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों को भी पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
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आयुष्मान काउंटर पर दो घंटे से कोई नहीं बैठा
मेरे पैर मेंं फ्रैक्चर आया हुआ है और मुझे भी अपने घुटने का इलाज आयुष्मान कार्ड से करवाना है। अस्पताल में बनाए गए आयुष्मान सेंटर पर सही तरीके से इलाज की प्रक्रिया नहीं पूरी हो पाई है। सही जानकारी नहीं मिलने के कारण इलाज नहीं हो पाया है। -साहिल, निवासी अंबाला
अस्पताल में मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाएं उन्हें दी जा रही हैं। अगर इस तरह का हाल आयुष्मान सेंटर पर बना है तो इसकी जांच कराई जाएगी। सभी डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि इलाज में मरीजों के किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -डॉ. रानी सिंह, डायरेक्टर, मदर टेरेसा साकेत आर्थोपेडिक अस्पताल
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