चंडीगढ़। मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू सुविधा न होने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को 10 दिन की अंतिम मोहलत देते हुए कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2 जनवरी के आदेश की अनुपालना में अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मालेरकोटला सिविल अस्पताल में आज तक आईसीयू स्थापित नहीं हो पाया है। इलाज के अभाव में हर दिन मरीज की जान जा रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत पहले ही राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दे चुकी है लेकिन अब तक अपेक्षित हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू न होने को चौंकाने वाला करार देते हुए राज्य के स्वास्थ्य सचिव से पूरे राज्य के सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं की उपलब्धता का विस्तृत हलफनामा मांगा था। पीठ ने तब टिप्पणी की थी कि इतनी बड़ी आबादी वाले जिले में आईसीयू का अभाव न केवल आश्चर्यजनक बल्कि अत्यंत गंभीर विषय है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि जब राज्य पर बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना एक संप्रभु दायित्व है तो फिर सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए निजी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता क्यों रखी जा रही है। रिकार्ड पर रखे गए आंकड़ों का हवाला देते हुए अदालत ने उल्लेख किया कि पंजाब के 23 जिलों में से केवल छह जिलों में ही एमआरआई मशीन उपलब्ध है।