जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी रमन खन्ना और अन्य पर गिरेगी गाज
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने हाजिर होकर दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। संयुक्त निदेश आयुर्वेद पद पर जिला यूनानी अधिकारी रमन खन्ना को करंट ड्यूटी चार्ज सौंपने के मामले में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव कोर्ट के आदेश पर हाजिर हुए। हाईकोर्ट ने विभाग के जवाब दाखिल न करने पर कड़ी फटकार लगाई और अगली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
प्रधान सचिव ने बताया कि इस मामले में विभाग को अधिकारियों की ओर से सूचना नहीं दी गई थी जिसके चलते जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। प्रधान सचिव ने बताया कि इस देरी के लिए खन्ना समेत अन्य अधिकारी जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट को सूचित किया जाएगा। इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेकर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और प्रधान सचिव को अगली सुनवाई पर मौजूदगी से छूट दे दी।
मोहाली निवासी पलविंदर सिंह ने एडवोकेट विकास चतरथ के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि 1 अक्तूबर 2025 को संयुक्त निदेशक आयुर्वेद पद रिक्त हुआ था। याची ने कहा कि वह इस पद के लिए योग्य था लेकिन उसे पदोन्नत कर इस पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई। 6 अक्तूबर को जिला यूनानी अधिकारी रमन खन्ना को करंट ड्यूटी चार्ज सौंप दिया गया। याची ने कहा कि सरकार का निर्णय गलत और मनमाना है। रमन खन्ना इस पद के लिए योग्य नहीं थे।
याची पलविंदर ने बताया कि सरकार ने वरिष्ठता में खन्ना को उनसे ऊपर कर दिया जिसे याची पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दे चुका है। यदि योग्यता मानकों की बात करें तो खन्ना उस पर भी खरे नहीं उतरते हैं। इस पद के लिए तीन वर्ष का जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी ऑफिसर के तौर पर अनुभव जरूरी है जो खन्ना के पास नहीं है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि खन्ना को यह पद सौंपने के आदेश पर क्यों न रोक लगा दी जाए।