हाईकोर्ट ने कहा- यह अदालत के आदेशों की अवहेलना, कोर्ट से ही गिरफ्तार करना चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) हरजिंदर सिंह को कड़ी फटकार लगाई है। एएसआई आपराधिक मुकदमे में गवाही के लिए निचली अदालत में बार-बार पेश नहीं हो रहा था लेकिन वह आरोपी की जमानत का विरोध करने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गया।
हाईकोर्ट ने इसे अदालत के आदेशों की अवहेलना और गंभीर लापरवाही माना। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी को कोर्ट से ही गिरफ्तार करना चाहिए। इससे दूसरे अधिकारियों को भी कड़ा संदेश मिलता। हालांकि, एएसआई की बिना शर्त माफी और गवाही देने के आश्वासन पर उसे आखिरी मौका दिया गया।
अदालत ने उसे 9 सितंबर को सुबह 10 बजे निचली अदालत में पेश होकर गवाही दर्ज कराने का आदेश दिया। उसे अपनी लापरवाही के लिए लिखित रूप से बिना शर्त माफी मांगने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, उसके वेतन से 50 हजार रुपये काटने के आदेश दिए गए हैं। जस्टिस आलोक जैन ने सरकारी गवाहों के ऐसे रवैये को मुकदमों के लंबित रहने की एक बड़ी वजह बताया।
अदालती कार्यवाही में बाधा :
अदालतें सरकारी गवाहों को बुलाने के लिए पर्याप्त अवसर देती हैं। इसके बाद जमानती और गैर-जमानती वारंट भी जारी किए जाते हैं लेकिन संबंधित अधिकारी फिर भी अदालत में पेश नहीं होते। इससे मुकदमों की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाती। अनावश्यक रूप से तारीखें लगती रहती हैं।
पुलिस महकमे को संदेश :
हाईकोर्ट ने तरनतारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया है। एएसआई हरजिंदर सिंह की लिखित माफी को जिले के सभी पुलिस थानों में प्रसारित किया जाए। इसे दूसरे जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ भी साझा करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य सरकारी गवाहों की जिम्मेदारी को लेकर पुलिस महकमे में स्पष्ट संदेश देना है।