चंडीगढ़। लगातार दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से बचते आए सुमेध सिंह सैनी की 17 सितंबर 2020 की एफआईआर में गिरफ्तारी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गैर कानूनी करार दे दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सैनी को मिली जमानत के बावजूद इस तरह से उन्हें गिरफ्तार करना गैर कानूनी है ऐसे में उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
सैनी की रिहाई को लेकर वीरवार देर रात जारी आदेश ने विजिलेंस की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर दिए। हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश जारी करते हुए कहा कि जब 12 अगस्त को उन्हें जमानत दी जा चुकी थी तो उसी प्रकार के आरोप के चलते सैनी को क्यों गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी सीधे तौर पर हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में यदि विजिलेंस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है तो उन्हें पहले 7 दिन का नोटिस दिया जाए और फिर कोर्ट की अनुमति से उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। वहीं वीरवार को देर रात सैनी को रिहा कर दिया गया।
विजिलेंस की दलीलें हाईकोर्ट ने की खारिज
हाईकोर्ट में विजिलेंस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि किसी व्यक्ति को ब्लैंकेट बेल नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि सामान्य परिस्थितियों को लेकर ये आदेश है, लेकिन यदि कोर्ट को लगता है कि परिस्थितियां असामान्य हैं तो कोर्ट इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार रखता है।
जांच अधिकारी ने बेंच पर उठाए सवाल
विजिलेंस के जांच अधिकारी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को ईमेल के माध्यम से निवेदन किया कि इस केस की सुनवाई किसी अन्य बेंच को दी जाए, क्योंकि यह बेंच बहुत जल्दबाजी कर रही है। बेंच ने कहा कि इस ईमेल को लेकर मुख्य न्यायाधीश से कोई आदेश अभी तक नहीं आया है। साथ ही किसी भी पक्ष के वकील ने ऐसा निवेदन नहीं किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अवैध हिरासत का मामला है और इस तरह के मामलों में जल्दबाजी होती ही है।