पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) के मुख्य प्रशासक को अवमानना याचिका पर जवाब न देना भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश दिया है। जवाब न देने और उनकी तरफ से किसी के पेश न होने के चलते हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।
हरदेव सिंह ने एडवोकेट अरुण सिंगला के माध्यम से अवमानना याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (पीएसआईडीसी) में डिप्टी जनरल मैनेजर था। 1996 में पुडा ने याचिकाकर्ता को डेपुटेशन पर लेकर उसे जनरल मैनेजर नियुक्त कर दिया और 1 मई 2001 को पुडा ने याचिकाकर्ता को पुडा में ही सम्मिलित कर लिया। पुडा के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक के पद पर नियुक्त होने के लिए जनरल मैनेजर के पद पर पांच साल का अनुभव अनिवार्य था लेकिन जनरल मैनेजर के पद पर पांच वर्षों पर पूरे होने के बाद भी याचिकाकर्ता को अतिरिक्त मुख्य प्रशासक के पद पर नियुक्त करने पर गौर नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता ने इसके खिलाफ 2009 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी जिसका हाईकोर्ट ने निपटारा करते हुए पुडा को स्पीकिंग आर्डर पास करने के आदेश दिए थे। पुडा ने याचिकाकर्ता की मांग को अस्वीकार कर दिया जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने 2014 में याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को 2006 से अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर नियुक्ति दे दी।
इस फैसले को याचिकाकर्ता ने डबल बेंच में अपील दायर कर चुनौती देते हुए कहा कि जनरल मैनेजर के पद पर मई 2001 में पांच वर्ष पूरे हुए थे न कि 2006 में। डबल बेंच ने 2022 में इसे स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2006 के बजाय 2001 से स्वीकार करते हुए तीन महीनों में कार्रवाई का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के चलते याची ने अवमानना याचिका दाखिल की। याचिका पर हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब न देने पर हाईकोर्ट ने अब मुख्य प्रशासक के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए हैं।