चंडीगढ़। संगरूर में नकली शराब से हुई मौतों के मामले में आरोपी महिला की ओर से नियमित जमानत देने की मांग को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि याची ने नकली और जहरीली शराब की सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इससे कई निर्दोष लोगों की मौत हुई, ऐसे गंभीर आरोपों की स्थिति में नियमित जमानत नहीं दी जा सकती।
सोमा कौर ने संगरूर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 16 जुलाई, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें उन्होंने याची की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उसकी बेल याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता, दोषी पाए जाने पर संभावित सजा और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत नहीं देना उचित होगा। साथ ही ट्रायल सही गति से चल रहा है और पांच गवाहों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। ऐसे में जमानत का कोई आधार नहीं बनता है।
22 मार्च 2024 को सिटी सुनाम पुलिस स्टेशन में आईपीसी की विभिन्न धाराओं, अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पंजाब आबकारी अधिनियम के तहत हरमेश सिंह की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप के अनुसार गांव में अवैध शराब बेची जा रही थी और 21 मार्च 2024 को उसके पिता बुध सिंह और अन्य ग्रामीणों ने आरोपी से शराब खरीद कर पी और इसके बाद उनके पेट में तेज दर्द व आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।
इसी समय के आसपास दो अन्य ग्रामीणों की भी नकली शराब पीने से मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम और विसरा रिपोर्ट से पता चला कि मौत मिथाइल अल्कोहल जहर पीने से हुई थी, जो आम तौर पर मौत का कारण बनने के लिए काफी था।
याची ने तर्क दिया कि उसे शक के आधार पर फंसाया गया है, उससे कोई रिकवरी नहीं हुई है। वह मार्च 2024 से हिरासत में है और बीमारियों से पीड़ित है। कोर्ट ने कहा कि याची पर नकली शराब खरीदने और सप्लाई करने और बची हुई शराब को अपने घर के पास एक तालाब में डालने का आरोप है, जिससे अपराध के सबूत गायब हो गए।