चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने क्लाउड पार्टिकल निवेश घोटाले के आरोपी अरिफ निसार को नियमित जमानत देने से इन्कार कर दिया है। सुमित गोयल की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि आरोपी की समूह की कंपनियों से सक्रिय संबद्धता और धनशोधन योजना में भूमिका दिखती है।
ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत इस मामले की जांच शुरू की थी। अरिफ निसार ने दलील दी थी कि वह समूह में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा था। उसे अपनी सेवाओं के बदले पारिश्रमिक मिलता था। हाईकोर्ट ने कहा कि प्राप्त धनराशि के स्रोत और अपराध से संबंध का आकलन मुकदमे के दौरान होगा।
ईडी के अनुसार, वीयूनाउ समूह की कंपनियां निवेशकों को क्लाउड भंडारण सुविधाओं के नाम पर आकर्षित करती थीं। उन्हें क्लाउड पार्टिकल की बिक्री का झांसा देकर निवेश कराया जाता था। निवेशकों को आकर्षक किराया मिलने का भरोसा दिया जाता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनियों की वास्तविक भंडारण क्षमता दावों के अनुरूप नहीं थी।
आरोपों की गंभीरता :
अदालत ने कहा कि निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और धनशोधन के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जांच में यह भी आरोप लगा कि बाद के निवेशकों के धन का उपयोग पहले के निवेशकों को किराया देने के लिए होता था। अदालत ने भंडारण क्षमता के दावों और वास्तविक परिचालन क्षमता के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना। निवेशकों के धन के गलत इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को इस स्तर पर अनदेखा नहीं किया जा सकता।
वित्तीय अनियमितताएं और बचाव पक्ष :
कंपनियों के बैंक खातों में 125 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली थी। संबंधित विदेशी धन प्रेषण करीब 75 करोड़ रुपये बताया गया। अरिफ निसार ने लंबे समय से हिरासत में होने और मुकदमे में देरी की दलील दी। अभियोजन पक्ष ने 52 गवाहों की सूची और बड़ी संख्या में दस्तावेज पर भरोसा किया है। बचाव पक्ष ने कहा कि केवल हिस्सेदारी या सेवाएं देने से कोई आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं होता।