चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामलों में मामूली नकदी को ड्रग मनी बताकर कठोर धाराओं को लागू करने की प्रवृत्ति पर पुलिस को चेताते हुए कहा कि अब इसे रोकना होगा।
जस्टिस अनूप चितकारा ने एक आरोपी को नियमित जमानत देते हुए कहा कि यह देखा गया है कि पुलिस अकसर आरोपियों से मिली छोटी रकम को भी ड्रग मनी बताकर एनडीपीएस एक्ट की सख्त धाराओं का सहारा ले लेती है जबकि यह रकम व्यक्तिगत खर्च या यात्रा व्यय के लिए भी हो सकती है।
मामला अमृतसर का है जहां पुलिस ने 11 जून को 150 ग्राम हेरोइन के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से 2,500 रुपये की नकदी भी बरामद की और उस पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जस्टिस चितकारा ने स्पष्ट किया कि 150 ग्राम हेरोइन कॉमर्शियल क्वांटिटी नहीं है, इसलिए धारा 37 के तहत लगाए जाने वाले कठोर जमानत प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
पुलिस के पास इस बात का कोई सबूत नहीं था कि जब्त 2,500 ड्रग मनी थी। मात्र इतनी रकम के आधार पर धारा 27ए लगाना और इस आधार पर जमानत से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को अनिश्चितकाल तक सीमित नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत स्वतंत्रता अत्यंत मूल्यवान मौलिक अधिकार है, जिसे केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही सीमित किया जाना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए आरोपी को शर्तों के साथ यह कहते हुए नियमित जमानत प्रदान की कि मौजूदा परिस्थितियों और बरामद मात्रा को देखते हुए ट्रायल से पहले लंबी कैद उचित नहीं है।